नए नाम जोड़ने पर प्रभावितों ने जताई आपत्ति, पंचनामा बनाकर नोडल अधिकारी को दिया

Badwani News - छोटी कसरावद में अपात्र लोगों के नाम सूची में जोड़ने से ग्रामीणों में नाराजगी है। शुक्रवार को नोडल अधिकारी विवेक...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 06:41 AM IST
Anjad News - mp news the affected people raised objections on adding new names made a panchnama and gave it to the nodal officer
छोटी कसरावद में अपात्र लोगों के नाम सूची में जोड़ने से ग्रामीणों में नाराजगी है। शुक्रवार को नोडल अधिकारी विवेक पांडेय को गांव में बुलाया। सरपंच की मौजूदगी में लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई। पंचनामा बनाकर उन्हें सौंपा। साथ ही 2001 के सर्वे के मुताबिक प्रभावितों को आवासीय पट्‌टे व अनुदान दिलाने की मांग की है। लोगों ने बताया गुरुवार को नोडल अधिकारी ने गांव का दौरा कर 16 परिवारों के पंचनामा बनाए थे। ग्रामीण जगदीश धनगर ने बताया गांव के सभी लोगों की मांग है 2001 में 364 लोगों का सर्वे कर मुआवजा दिया। 80 फीसदी लोगों को प्लाट दिए। शेष 20 फीसदी को डूब में शामिल कर बैक वाटर लेवल की पुरानी स्थिति को मानते हुए पुनर्वास अनुदान व आवासीय पट्‌टे दिए। लेकिन अफसरों का कहना है जैसे डूब आएगी, सर्वे करेंगे। उन्होंने बताया गुरुवार सांसद गजेंद्र पटेल ने दौरा किया था।

नोडल अधिकारी पांडेय ने बताया लोगों ने पूर्व की सूची के मुताबिक वे पुनर्वास के पात्र हैं। कुछ लोग बाद में बसे थे। वे अब नाम जुड़वाना चाहते हैं। आपत्तियों व पंचनामा को पुनर्वास अधिकारी व वरिष्ठ अधिकारी को देंगे। 364 परिवार में से 15% को छोड़कर शेष को मुआवजा व प्लाट मिला। वर्तमान सूची के तहत 39 परिवार को जन-धन हानि से बचाना उद्देश्य है। जिन मकानों तक पानी आया है, एनवीडीए के माध्यम से उनका सर्वे होगा। पांडेय ग्राम कुंडिया पहुंचे उन्होंने बताया कुंडिया में प्रभावितों ने उनके वाहन को घेरकर अभद्र व्यवहार किया। इसकी जानकारी अफसरों को देंगे।

जिन मकानों तक पानी है उनका सर्वे होगा

छोटी कसरावद में महिलाओं व पुरुषों द्वारा घर के आसपास बढ़ते जलस्तर का जायजा लेने का अनुरोध करने पर नोडल अधिकारी विवेक पांडेय ने हाथ जोड़कर उनसे कहा, अम्मा आपके घर के आसपास भी निरीक्षण करूंगा।

इधर... सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि बनी टापू

मेधा पाटकर ने कार्यकर्ताओं के साथ शुक्रवार सेगांव, आवली का दौरा किया। उन्होंने बताया इन गांवों में 500 एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि टापू बन गई है। खेतों में लगी फसलों को करोड़ों का नुकसान हुआ है। इसकी भरपाई की जाए। 90 परिवारों का घर प्लाट व 5.80 लाख रु. मिलना बाकी है। इस दौरान भू-अर्जन अधिकारी, तहसीलदार, पटवारी सहित राहुल यादव व ग्रामीण मौजूद थे।

डूबा मकान... बरसाती से बनाया गया तंबू

राधेश्याम पिता रूखड़िया का मकान बैक वाटर में डूब गया है। 3 अन्य भाईयों व परिवार के साथ बरसाती के तंबू में रह रहे हैं। राधेश्याम व संगीताबाई राजेंद्र ने बताया सर्वे सूची में नाम है। लेकिन अभी तक घर प्लाट व मुआवजा नहीं मिला है। कोई और ठिकाना न होने से डूब चुके मकान के पास ही तंबू बनाकर रहना पड़ रहा है।

इधर... टापू बना छोटा बड़दा, 11 दिन पहले अनशन से थी चहल-पहल, अब भी 80 से अधिक परिवार बसे

छोटा बड़दा के त्रिवेणी चौक में पानी भरने से गांव टापू बन गया है।

भास्कर संवाददाता | अंजड़

ग्राम छोटा बड़दा। 11 दिन पहले यानी 2 सितंबर तक यहां नर्मदा बचाओ आंदोलन प्रमुख मेधा पाटकर के अनशन की वजह से चहल-पहल थी। अनशन खत्म होने के बाद जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। इस कारण शुक्रवार को गांव टापू बन गया। बस स्टैंड के त्रिवेणी चौक पर 3 फीट व गांव में जाने वाले रास्ते पर करीब 6 फीट पानी भर गया है। अब भी गांव में 80 से 90 परिवार बसे हुए हैं।

सरदार सरोवर बांध में पानी भरने के कारण गांव में तेजी से बैक वाटर फैल रहा है। मुक्तिधाम वाले मार्ग से पानी फैलता हुआ चौक में आ रहा है। बस स्टैंड स्थित त्रिवेणी चौक, जो गांव का मुख्य चौराहा है। यह चौक नर्मदा घाटी के कई छोटे-बड़े आंदोलन का साक्षी रहा है। त्रिवेणी चौक जलमग्न होने से गांव में आवागमन का एकमात्र रास्ता भी बंद हो गया है। इससे गांव का संपर्क लगभग टूट गया है। यहां अभी 80 से 90 परिवार के लोग मौजूद है। इसमें से 58 परिवार नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़े हैं, जो उचित मुआवजा व सम्पूर्ण पुनर्वास की मांग को लेकर अब भी गांव में ही बसे हुए हैं। गांव में ऐसे कई मकान हैं, जो सर्वे में डूब क्षेत्र से दूर बताए गए थे। लेकिन अब चारों ओर पानी से घिर जाने के बाद भी यहां रह रहे परिवारों के लिए बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।

सरदार सरोवर बांध
वयस्क पुत्र-पुत्रियों को प्लाट मिलना बाकी

छोटा बड़दा के टापू बनने की खबर मिलते ही मेधा गांव पहुंची। गांव का जायजा लेकर प्रभावितों के साथ बैठक की। छोटा बड़दा में 54 परिवारों के मकानों का भू-अर्जन हुआ है। इसका मूल मुआवजा मिलना बाकी है। इसके अलावा वयस्क पुत्रों व पुत्रियों को घर प्लाट मिलना बाकी है। बावजूद प्रभावितों का पुनर्वास किए बगैर डुबाया जा रहा है, जो गैरकानूनी है। गांव के बाहर लगे ट्रांसफार्मर से लाइन जोड़कर बिजली सप्लाय करने को लेकर लोगों से चर्चा की। विविकं अफसरों को भी गांव बुलाने की मांग की।

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