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मेहनत का रंग: हमारे यहां रंगा जाता है गुजरात के काठियावाड़ी दुपट्‌टों का कपड़ा

एक वर्ष पहले
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क्योंकि कपड़ा रंगाई के लिए अनुकूल है खंडवा का मौसम

मेहनत हमेशा रंग लाती है। कुछ ऐसा ही कर रहे हैं दो युवा, जो 50 साल पहले खत्म हो चुकी खंडवा जिले की कपड़ा रंगाई की हस्तकला को पहचान देने में जुटे हैं। कपड़ा रंगाई के लिए खंडवा का वातावरण अनुकूल होने के कारण यहां कपड़ा रंगाई कर अहमदाबाद भेजा जा रहा है। इस कपड़े से काठियावाड़ी दुपट्‌टे बनाए जा रहे हैं। नागचून रोड स्थित खत्री कॉलोनी के मोहम्मद इब्राहिम और मो. इस्माइल ने बताया हमारी यूनिट में प्रतिदिन 1 हजार मीटर कपड़ा रंगा जाता है। अहमदाबाद के व्यापारी बुरहानपुर से कपड़ा खरीदकर हमें रंगाई के लिए देते हैं। उनका दावा है कि खंडवा जिले में एकमात्र इकाई है, जहां इतने बड़े पैमाने पर कपड़े की रंगाई की जाती है। इस्माइल ने बताया यह हमारा पुश्तैनी काम है, लेकिन लंबे समय से छूट चुका था। 8 साल पहले राजस्थान के पाली से हमारे रिश्तेदार आए, उन्होंने हमें पुन: इसके लिए प्रेरित किया। कपड़ों पर यहां का कलर पक्का होता है, इसीलिए अहमदाबाद और यूपी के व्यापारी कपड़ा रंगाई के लिए यहां भेजते हैं। इसी कपड़े को अपने ब्रांड से बेचते हैं।

फोटो- विकास चौहान

50 साल पहले रंगाई का उद्योग बंद हो चुका

08 साल से काम कर रहे दोनों युवा

01 हजार मीटर कपड़ा रोज रंगते हैं

2500 मीटर कपड़ा 15x25 की चाली पर सुखाया जाता है

खिराला में बड़े पैमाने पर होती थी रंगाई, खंडवा के मोहम्मद इब्राहिम और इस्माइल खत्री फिर इस कला को पहचान देने में जुटे हैं

खिराला में कपड़ा रंगाई का इतिहास

इस्माइल ने बताया खिराला में करीब 400 साल से कपड़ा रंगाई का काम चलता था। यह हस्तकला है, लेकिन जब मशीनें आ गईं तो करीब 50 सालों से काम बंद पड़ गया। यहां का रंगा कपड़ा देशभर में जाता था। गांव में ही नदी किनारे सरकार भवन बना है, जहां यह काम होता था। यहां का मौसम और पानी के कारण यह उद्योग तेजी से बढ़ा था। फिर धीरे-धीरे यहां के परिवार दूसरी जगह बस गए और यह उद्योग खत्म हो गया। इस्माइल ने कहा यदि शासन-प्रशासन मदद करें तो यह उद्योग फिर पनप सकता है। इससे रोजगार भी बढ़ेंगे।

खंडवा का वातावरण अनुकूल

इस्माइल ने बताया बुरहानपुर और सूरत के वातावरण में काफी नमी है। इस कारण वहां के कपड़े पर रंगाई इतनी पक्की नहीं होती। कुछ लोगों ने प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हुए। जबकि खंडवा के वातावरण में नमी बहुत कम है। इस कारण यहां पर कपड़ा रंगाई के दौरान धागा फूलता है और रंग पक्का चढ़ता है।

कपड़े पर ऐसे चढ़ाते हैं पक्का कलर

लूम के पकड़े को सिलिकेट कैमिकल में डालकर उसका स्टार्च निकाला जाता है। इसके बाद कपड़े मेंे सिर्फ धागा रह जाता है। एंजाइम को पानी में डालकर उसमें कपड़े को गीला करते हैं। स्टार्च पूरी तरह निकलने के बाद दो बार पानी में कपड़े को धोया जाता है। फिर कलर किया जाता है। कपड़े को पॉलिथीन से आठ घंटे तक पैक किया जाता है। इससे कपड़े पर पक्का कलर चढ़ता है। इससे कपड़े की क्वालिटी भी अच्छी होती है।
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