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तहज़ीब के रंगों ने रचा अमन औरआपसदारी का रोमांच

एक वर्ष पहले
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आईईएस यूनिवर्सिटी द्वारा अंर्तराष्ट्रीय महिला दिवस पर सम्मान समारोह का आयोजन

भोपाल|आईईएस यूनिवर्सिटी द्वारा अंर्तराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर नारी सशक्तिकरण पर सेमिनार का आयोजन किया गया साथ ही शहर की प्रख्यात महिलाओं जो उनके क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने जीवन और कॅरियर को सोसायटी एवं महिलाओं के भविष्य को गौरवान्वित करने के लिए समर्पित किया। आईईएस यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ उर्मिला शुक्ला (IAS), डायरेक्टर, डब्ल्यूएएलएमआई मध्यप्रदेश, मुख्य अतिथि एवं डॉ सुनीता सिंह, प्रो चांसलर, आईईएस यूनिवर्सिटी द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया। तदुपरान्त आईईएस यूनिवर्सिटी एवं आईईएस पब्लिक स्कूल के फीमेल स्टाफ मेंबर द्वारा मनमोहक डांस के प्रस्तुति दी साथ ही नारी सशक्तिकरण पर लघुनाटिका का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के शुभारंभ में डॉ सुनीता सिंह ने स्वागत भाषण दिया साथ ही बताया के आज देश विदेश में नारी हर जगह बड़चढ़ कर कार्य कर रही है एवं देश एवं दुनिया मे हर जगह परचम फैला रही है। महिलाओं को पता होना चाहिए कि खुशहाल जीवन कैसे जिया जाए क्योकि अगर एक महिला खुश है तो पूरा परिवार, समाज और राष्ट्र खुशी की ओर जाता है।




भोपाल| मुरली की मोहक तान, ढोल-मृदंग से उठती लय-ताल की अलमस्त उड़ान, प्यार-मनुहार भरे गीतों का गान और इस रूहानी सोहबत पर मचलती नृत्य की थिरकनों का गहराता रोमांच...। तहज़ीब के रंगों से सराबोर यह दिलकश नज़ारा शुक्रवार की शाम भोपाल के रसिकों के लिए वसंती पैगाम बन गया। टैगोर विश्व कला एवं संस्कृति केंद्र की ओर से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के मुक्ताकाश मंच पर ‘होरी हो ब्रजराज’ की शक्ल में सजी यह सलोनी शाम यकीनन दर्शकों के ज़ेहन में मुद्दतों तक क़ायम रहेगी। ब्रज और मैनपुरी लोक अंचल में सदियों से प्रचलित होली के गीतों को प्रसिद्ध नृत्यांगना क्षमा मालवीय ने पुरू कथक अकादमी के साठ कलाकारों की मंडली के साथ मनोहारी भाव-भंगिमाओं और लयकारी में जीवंत कर दिया। प्रख्यात कथाकार-कवि संतोष चाैबे की मूल संकल्पना और विचार को कलात्मक ताने-बाने के साथ बहुत रोचक शैली में पेश किया कला समीक्षक तथा उद्घोषक विनय उपाध्याय ने। जबकि अनूप जोशी ‘बंटी’ ने होली के सतरंगी परिवेश को अपनी प्रकाश-परिकल्पना से दिलकश बना दिया। बारह लोक गीतों के साथ ‘होरी हो ब्रजराज’ का कारवां कृष्ण-राधा और ब्रज के हुरियारों के संग अठखेलियाँ करता प्रेम, सद्भाव, अमन, एकता और भाईचारे की सुंदर मिसाल बना। वरिष्ठ संगीतकार संतोष कौशिक और राजू राव ने इन गीतों का संगीत संयोजन किया।

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