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द ग्रेट एमपी पॉलिटिकल ड्रामा

एक वर्ष पहले
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2001 में पिता माधवराव के निधन के तीन महीने बाद ज्योतिरादित्य कांग्रेस में शामिल हो गए । सोनिया से मिलाने उन्हें स्वयं दिग्विजय सिंह ले गए थे।

उन्होंने पारंपरिक गुना सीट से चुनाव लड़ा, जो पिता के निधन से खाली हो गई थी। वे भारी बहुमत से जीते। 2002 की जीत के बाद वे 2004, 2009 और 2014 में भी सांसद निर्वाचित हुए।

ज्योतिरादित्य सिंधिया के बुधवार को भाजपा में शामिल हो जाने के बाद अचानक फिर प्रासंगिक हो गया राहुल गांधी का सब्र और समय वाला ट्वीट। सिंधिया के कॅरियर के ये तीन पड़ाव भी सबसे अहम..

आिखर... सब्र टूटा, अब समय की परीक्षा
11 मार्च 2020... और बुधवार को भाजपा के मंच पर

मप्र में विधानसभा चुनाव के बाद एक साल से उपेक्षा झेल रहे ज्योतिरादित्य भाजपा में शामिल हो गए। बड़ौदा राजपरिवार ने सिंधिया और मोदी के बीच मध्यस्थता कराई।

भाजपा में शामिल होते ही पार्टी ने सिंधिया को राज्यसभा का उम्मीदवार बना दिया। संभवत: वे 13 मार्च को भोपाल आकर राज्यसभा के लिए पर्चा भर सकते हैं। चर्चा यह भी है कि उन्हें केंद्र में मंत्री भी बनाया जा सकता है।

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