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भीतरी दीवारें बताती हैं स्त्री परिवार को बांधे रखती है

एक वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर . भोपाल

महिलाओं के जीवन पर केंद्रित नाटक भीतरी दीवारें सोमवार को राजीव वर्मा के निर्देशन में शहीद भवन में खेला गया। प्रस्तुति भोपाल थिएटर ग्रुप के कलाकारों ने दी। विजय तेंदुलकर का लिखा यह नाटक हिंदी भाषा में खेला गया। सबसे पहले मराठी में 1958 में इसका मंचन किया गया था। यह नाटक का दूसरा मंचन था, जिसमें बताया गया कि स्त्री परिवार की अहम सदस्य होती है। वह मुश्किल परिस्थितियों में भी परिवार को बांधकर रखती है।

ये है नाटक की कहानी

नाटक की कहानी नाना और पार्वती के इर्द-गिर्द घूमती है। नाना प्रूफ रीडिंग का काम करते हैं। बड़ा बेटा सदाशिव इंश्योरेंस कंपनी में नौकरी करता है। पार्वती की मंदिर में शालिनी से मुलाकात होती है। पार्वती उसकी शादी सदाशिव से कराना चाहती है। नाना की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी सदाशिव पर आ जाती है। वहीं सदाशिव प|ी से मारपीट करता है, जब यह बात पार्वती को पता चलती है तो उसे अपने साथ हुई घटनाओं की याद आती है और वह बहु मन्दा के साथ खड़ी हो जाती है।

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