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नायिका के ट्रेन का सफर, आॅफिस में बाॅस की डांट और क्रिकेट को कथक में किया साकार
सिटी रिपोर्टर . इंदौर
मुंबई की नृत्यांगना रूपाली देसाई ने आधुनिक स्त्री के ट्रेन में सफर करने, आॅफिस में बाॅस की डांट और क्रिकेट को कथक में साकार किया। उनकी इस प्रस्तुति में प्रयोग करने की गहरी इच्छा भी प्रकट हो रही थी और कथक को अपने समय से जोड़ने की ललक भी दिखाई दे रही थी। माई मंगेशकर सभागृह में फाग रंग कार्यक्रम में कथक के अलावा शहर की शास्त्रीय गायिका पूर्वी निमगांवकर ने गायन भी किया।
राग अहिर भैरव के
साथ होरी गाई
दर्शकों की संख्या कम देखकर रूपाली देसाई ने कहा कि कला में रंग भरने के लिए चंद कलाप्रेमी ही काफी हैं, ज़रूरी नहीं कि पूरा हाॅल भरा हो। इसके बाद उन्होंने अपनी बेटी और शिष्या दिशा देसाई के साथ अर्धनारीनटेश्वर की प्रस्तुति दी। कथक गुरु पंडित बिरजू महाराज रचित इस शिवशक्ति वंदना को उन्होंने कल्पनाशीलता और अलग-अलग नृत्य संरचनाअों से शिव-पार्वती के रूप को साकार किया। तालपक्ष में लयकारी के साथ पारंपरिक तीन ताल पर कथक किया। इसमें सुंदर पद संचालन और चक्कर की विविधता थी। रूपाली देसाई ने आधुनिक नायिका के लोकल ट्रेन के सफर को परण में प्रस्तुत किया। इसमें पारंपरिक बोलों पर अभिनय अंग से जीवंत किया। इमोहे छेड़ो ना छेड़ो ना नंद के बिहारी पर प्रस्तुति दी। फिर दोनो नृत्यांगनाओं ने क्रिकेट के खेल को दर्शाया। दिशा ने शिखर सम्मान से सम्मानित शहर की नृत्यांगना डॉ. विभा दाधीच रचित काली परन में प्रस्तुत की जिसमें रौद्र रस था। इनके साथ तबले पर रोहित देव और हारमोनियम पर अतुल फड़के ने संगत दी। डॉ पूर्वी निमगांवकर ने राग अहीर भैरव में तीन ताल में निबद्ध रचना रसियां म्हारा पेश कीऔर फिर द्रुत तीन ताल में स्वरचित बंदिश मैं वारी जाऊं तोपे पिया गाई। तानों की सफाई और तेज लय में बोल तान का अंदाज अच्छा था। फिर होरी गाई जिसमें पहली बंदिश गिरिजा देवी की उड़त अबीर गुलाल लाली छाई और दूसरी बंदिश अपनी गुरु अश्विनी भिड़े की बनाई बंदिश प्रस्तुत की। तबले पर हितेन्द्र दीक्षित, सारंगी पर जगदीश बारोट, हारमोनियम पर रचना पुराणिक ने संगत की। शुभा वेद्य, असिता शर्मा, राजेश्वरी दीक्षित, अंकिता जोशी, लवीना निमगांवकर, रूपाली देसाई, दिशा देसाई का सम्मान किया गया। आभार आशुतोष निमगांवकर ने माना।