सांसद बोले- बायपास स्वीकृत किया तो शासन बजट भी दें, कलेक्टर ने कहा-सर्वे कर इसी महीने भेजेंगे प्रस्ताव

News - सड़क हादसे में केंद्रीय विद्यालय की शिक्षिका की मौत के बाद एक बार फिर रिंग रोड-बायपास शहर में चर्चा का विषय बना है।...

Feb 15, 2020, 08:10 AM IST

सड़क हादसे में केंद्रीय विद्यालय की शिक्षिका की मौत के बाद एक बार फिर रिंग रोड-बायपास शहर में चर्चा का विषय बना है। हालांकि पीडब्ल्यूडी ने कांग्रेस सरकार की ओर से मिली स्वीकृति के दो महीने बाद भी अभी तक प्राथमिक स्तर का ही बायपास का प्रस्ताव है। जिसे शासन के अमल में आने में ही पांच साल से ज्यादा का वक्त लग सकता है। क्योंकि 2011 में रिंग रोड के लिए बना प्रस्ताव शासन के पास 2012 में पहुंच चुका था, लेकिन उसे 2012-13 और 2013-14 के बजट में जगह नहीं मिली।

यह प्रस्ताव आज भी प्रदेश सरकार की आर्थिक समिति के पास पड़ा हुआ है। उस वक्त 37.5 किमी लंबे रिंग रोड के लिए 158.75 करोड़ रुपए और हरसूद रोड से इंदौर रोड वाया पंधाना रोड 16.2 किमी के बायपास के लिए 123.4 करोड़ रुपए का बजट बनाया था। इधर, बायपास के लिए कम बजट का प्रस्ताव कलेक्टर तन्वी सुंद्रियाल खुद प्रस्तावित जगह का निरीक्षण कर सर्वे रिपोर्ट फरवरी में ही शासन को भेजेंगी। वही भाजपा सांसद नंदकुमारसिंह चौहान ने कहा बायपास-रिंग रोड बनाना प्रदेश सरकार का काम है। कांग्रेस ने बायपास को स्वीकृति दी है तो इसका मैं स्वागत करता हूं। प्रदेश सरकार को बायपास निर्माण के लिए राशि भी जारी करनी चाहिए। विधायक देवेंद्र वर्मा ने कहा हम बायपास का विरोध नहीं कर रहे हैं। हमारा कहना है कि पूर्व में प्रस्तावित रिंग रोड के निर्माण में 65 प्रतिशत शासकीय व 30 प्रतिशत निजी भूमि आ रही है। जबकि बायपास में पूरी 100 प्रतिशत जमीन निजी ही आएगी। ऐसे में बायपास की लागत बढ़ने से मामला अटक सकता है। जबकि रिंग रोड के साथ ही हाफ रिंग रोड हरसूद नाका से इंदौर रोड वाया पंधाना रोड 16.2 का प्रस्ताव पहले ही शासन के पास है।

विधायक बोले- बड़े शहरों में लोडिंग-अनलोडिंग का काम दिन में नहीं होता है, केवल खंडवा में ही ऐसा हो रहा है

खंडवा | विधायक वर्मा ने जिला प्रशासन से तात्कालिक उपाय करने की मांग की। संयुक्त कलेक्टर को ज्ञापन देते हुए विधायक ने कहा रिंग रोड-बायपास एक लंबी प्रक्रिया जो शासन स्तर पर चल रही है। अगर यह तात्कालिक उपाय करेंगे तो इससे किसी प्रकार का बजट या आर्थिक भार शासन पर नहीं आएगा। पहले से जो सड़कें हैं उनका यदि प्रशासन उपयोग कर लेता है तो समस्या का हल हो जाएगा। भोपाल, इंदौर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में लोडिंग-अनलोडिंग का काम दिन में नहीं होता है। केवल खंडवा में ही भारी वाहनों से दिन में माल उतारा जाता है। वहीं रेत-गिट्‌टी के डंपर का काम रात में हो सकता है। इन कार्यों को कम से कम रात में ही कराएं। यदि प्रशासन द्वारा हमारी मांगों और समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया तो हम चरणबद्ध आंदोलन करेंगे। ज्ञापन देने वालों में पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष हरीश कोटवाले, अनूप पटेल, सुनील जैन, गोपी शर्मा, सुधांशु जैन, दिनेश पालीवाल, जीवन डिंडोरे, प्रवीण पांडे, रवि अव्हाड़, नीलेश माहुलिकर सहित पेंशनर्स एसोसिएशन के ओपी बुधोलिया, सुभाष शर्मा, सुरेंद्र गीते, गोपाल दास, हरिराम प्रजापति शामिल रहे।

डीपीआर सरकार के पास, सरकार को इसी महीने भेजूंगी कम खर्च का प्लान


बायपास पर मुझे कोई आपत्ति नहीं, प्रदेश शासन जल्दी शुरू करें काम


निर्माण व्यावहारिक नहीं, रिंग रोड पर काम करें प्रशासन


संयुक्त कलेक्टर से चर्चा करते विधायक सहित जनप्रतिनिधि एवं शहरवासी।

अब नए सिरे से बायपास के निर्माण की प्रक्रिया चली तो फिर 5 साल तक अटक जाएगा मामला

हरसूद रोड से इंदौर रोड वाया पंधाना 16.2 किमी के बायपास के लिए 123.4 करोड़ का था बजट


2012 में 37.5 किमी लंबे रिंग रोड के लिए शासन को भेजा था 158.75 करोड़ रुपए का प्रस्ताव

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