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कोरोना संकट के बीच विपरीत परिस्थितियों में जीत की कहानीसुपर-30 के आनंद कुमार के शब्दों में

News - एजुकेशन फ्रॉम होम घर पर तैयारी को मजबूती देंगे ये पोर्टल्स देश में फैल रहे कोरोना वायरस के प्रभाव को...

Mar 27, 2020, 06:41 AM IST

एजुकेशन फ्रॉम होम

घर पर तैयारी को मजबूती देंगे ये पोर्टल्स

देश में फैल रहे कोरोना वायरस के प्रभाव को देखते हुए सीबीएसई ने 19 मार्च से 31 मार्च तक होने वाली दसवीं और बारहवीं कक्षा की परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। इनमें दसवीं कक्षा की इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी और कम्प्यूटर एप्लीकेशन्स व बारहवीं कक्षा की लैंग्वेज, कम्प्यूटर से जुड़े विषय, ज्योग्राफी, बिजनेस स्टडीज व एडमिनिस्ट्रेशन, होम साइंस, बायोटेक्नोलॉजी और सोशियोलॉजी जैसे विषयों के एग्जाम शामिल हैं। देश में चल रहे लॉकडाउन के चलते लोग घरों में रहने को मजबूर हैं। ऐसे में स्टूडेंट्स एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे कैंडिडेट्स इस समय का उपयोग अपनी तैयारी को मजबूती देने में कर सकते हैं। परीक्षाओं की तैयारियों को प्रभावित होने से बचाने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सुझाव पर विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्म्स ने ऑनलाइन मटीरियल उपब्ध कराना शुरू किया है। इसके अलावा यूजीसी, एआईसीटीई, एनसीटीई, सीबीएसई, एनटीए, एनआईओएस और एमएचआरडी के आॅटोनॉमस ऑर्गेनाइजेशन्स को आॅनलाइन कंटेंंट डेवलप करने के भी निर्देश भी दिए गए हैं। फैक्ल्टी/टीचर्स/रिसर्चर्स/ नॉन टीचिंग स्टाफ को ऑनलाइन टीचिंग, इवैल्यूएशन, क्वेश्चन बैंक और प्रोजेक्ट्स बनाने के लिए भी कहा गया है। यहां पर स्टूडेंट्स और कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स की तैयारी कर रहे कैंडिडेट्स के लए कुछ पोर्टल्स की जानकारी दी जा रही है जो उनकी तैयारी के लिए कारगार साबित हो सकते हैं।

एनआरओईआर

एमएचअारडी के डिपार्टमेंट ऑफ स्कूल एजुकेशन एंड लिट्रेसी द्वारा नेशनल रिपॉजिटरी ऑफ ओपन एजुकेशनल रिर्सोसेस (एनआरओईआर) संचालित किया जाता है। इसमें लगभग 14,527 फाइल्स (डॉक्यूमेंट्स, इंटरैक्टिव, ऑडियो, फोटो आदि) अलग-अलग भाषा में अप्लोड की गई हैं। इसके अलावा इसमें ई-बुक्स के साथ- साथ ई-कोर्सेस और ई-लाइब्रेरी भी है। कैंडिडेट्स यहां से अच्छे एजुकेशनल मटीरियल पा सकते हैं।

स्वयं प्रभा

इस पोर्टल पर एनपीटीईएल, आईआईटी, यूजीसी, सीईसी, इग्नू, एनसीईआरटी और एनआईओएस द्वारा हाईस्कूल से पीजी कक्षाओं तक की पाठ्यसामग्री उपलब्ध कराई गई है। स्टूडेंट्स स्वयं प्रभा की वेबसाइट  www.swayamprabha.gov.in पर जाकर दिनभर में कभी भी अपनी जरूरत के अनुसार पाठ्य सामग्री का उपयोग कर सकते हैं। इसके साथ ही 32 डीटीएच चैनल्स के माध्यम से इनको टेलीकास्ट भी किया जाता है। इसमें आर्ट्स, साइंस, कॉमर्स, परफॉर्मिंग आर्ट्स, सोशल सांइसेंस एंड ह्यूमैनिटीज, इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, लॉ, मेडिसिन जैसे विषयों से सम्बंधित लेक्चर्स भी मौजूद हैं।

एनडीएलआई

नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया (एनडीएलआई) देश तथा विदेशों के शैक्षणिक संस्थानों से अध्ययन सामग्री एकत्र करने का एक प्लेटफॉर्म है। इसमें कम्प्यूटर साइंस, साइकोलॉजी, लैंग्वेज, टेक्नोलॉजी आदि से जुड़े वीडियो और ऑडियो लेक्चर्स मौजूद हैं। इसके अलावा स्टूडेंट्स इस प्लेटफॉर्म के जरिए वर्ल्ड ई-बुक लाइब्रेरी, साउथ एशिया आर्काईव, ओईसीडी आईलाइब्रेरी और सत्यजीत रे सोसायटी के कंटेंट पढ़ सकते हैं। प्ले स्टोर से अंग्रेजी, हिंदी और बांग्ला भाषा में एनडीएल का एप डाउनलोड किया जा सकता है।

गरीबी से लड़ा, कभी खाना तक नहीं मिलता था, अब जापान में कर रहा पढ़ाई, मिले नौकरी के कई ऑफर**

वाराणसी में रहने वाले दिलीप कुमार गुप्ता के पिता मैकेनिक थे। बचपन में पढ़ने की बहुत इच्छा के बावजूद उनका यह सपना पूरा नहीं हो पाया। पैसे की तंगी के चलते दसवीं कक्षा में पहुंचने से पहले ही उनकी पढ़ाई छूट गई। कई शहरों में मेहनत-मजदूरी करते हुए गुड़गांव पहुंचे। यहां एक फैक्ट्री में जनरेटर ऑपरेटर का काम करने लगे। प|ी और दोनों बच्चों के साथ किसी तरह गुजर-बसर कर रहे थे।

बड़े बेटे अभिषेक की छोटी उम्र से ही पढ़ाई में रुचि थी। अपनी हालत से दिलीप यह जान चुके थे कि शिक्षा ही उनके बच्चों का भविष्य बेहतर बना सकती है। अभिषेक जब स्कूल जाने की उम्र का हुआ तो वे उसे गुड़गांव के सबसे अच्छे स्कूलों में ले कर गए। हर स्कूल में उसका सलेक्शन हुआ, लेकिन बड़े स्कूलों की फीस, ड्रेस और किताब-कॉपी का खर्च दिलीप के वश के बाहर की बात थी। मन मसोसकर उन्होंने शहर के सबसे सस्ते स्कूल में उसका एडमिशन करा दिया।

अभिषेक शुरू से ही हर कक्षा में अव्वल दर्जे से पास होता। इसी दौरान एक दिन स्कूल में जापानी भाषा सिखाने वाले टीचर आए। वह जापानी भाषा सीखने लगा। भाषा सीखते-सीखते वह जापान के बारे में सोचता रहता और पता नहीं कब उसके मन में जापान जाने की इच्छा जाग गई। पिता यही सोचकर खुश थे कि विदेशी भाषा सीखने से वह गाइड का काम कर पाएगा, लेकिन कुछ दिनों बाद शिक्षक ने आना बंद कर दिया और जापान जाना तो दूर, वहां की भाषा सीखने की उसकी इच्छा भी अधूरी रह गई। निराश अभिषेक ने गणित में मन लगाना शुरू कर दिया। किसी ने बताया कि इंजीनियर बनने के लिए गणित में अच्छा होना जरूरी है तो उसे लगने लगा कि वह भी इंजीनियर बन सकता है। वर्ष 2012 में उसे दसवीं की बोर्ड परीक्षा देनी थी। इसी दौरान दुर्घटना में पिता घायल हो गए। काम पर जाना बंद हो गया और आमदनी भी। हालत यह थी कि एक वक्त का भोजन मिलना भी बड़ी बात थी। लेकिन अभिषेक लगन से अपनी पढ़ाई करता रहा। उसने अच्छे अंकों से दसवीं की परीक्षा पास की। वह इंजीनियरिंग की कोचिंग करना चाहता था, लेकिन इसके लिए परिवार के पास पैसे नहीं थे। वह खुद ही तैयारी करने लगा। वर्ष 2014 में इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में शामिल हुआ, लेकिन सफलता नहीं मिली। वह निराश हो गया। एक दिन जब उसके पिता फैक्ट्री में निराश बैठे थे, तो किसी ने सुपर 30 के बारे में बताया। इसके कुछ ही दिनों बाद अभिषेक मेरे सामने था। उसके चेहरे पर निराशा साफ झलक रही थी। वह आईआईटी में प्रवेश की तैयारी के लिए दिन-रात मेहनत करने लगा।

इसी बीच सुपर 30 की कामयाबी पर जापान में डॉक्यूमेंट्री बनी जो काफी चर्चित हुई। इससे प्रभावित होकर टोक्यो यूनिवर्सिटी ने संस्थान के छात्रों को मुफ्त शिक्षा देने का फैसला किया। अभिषेक ने सुना तो उसकी वर्षों पुरानी इच्छा एक बार फिर जाग उठी। उसे लगा कि उसके दोनों सपने - जापान जाना और इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना, एक साथ पूरे हो सकते हैं। टोक्यो यूनिवर्सिटी की टीम छात्रों के चुनाव के लिए पटना आई। अभिषेक इसमें भी अव्वल रहा और आईआईटी प्रवेश परीक्षा से पहले ही टोक्यो यूनिवर्सिटी में उसका सलेक्शन हो गया। स्कॉलरशिप के साथ हर साल भारत आने-जाने का पूरा खर्च यूनिवर्सिटी उठाएगी। कल उसने फोन किया और बताया कि उसके लिए आगे जापान में ही नौकरी के कई अच्छे अवसर हैं।

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