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सरकार का समय अध्यक्ष पर निर्भर, वे तय करेंगे, इस्तीफे कब स्वीकार करें

एक वर्ष पहले
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महाराज का राज्यसभाभिषेक
Áअगर 22 इस्तीफे मंजूर नहीं हुए और विधायक सदन में नहीं पहुंचे, तो बहुमत का आंकड़ा क्या होगा?

- बहुमत सदन में उपस्थित विधायकों की संख्या पर निर्भर करेगा। उपस्थिति का बहुमत ही माना जाएगा।

Áस्पीकर कुछ विधायकों के इस्तीफे मंजूर करें, कुछ के नहीं, तो क्या होगा?

- इसमें भी उपस्थित विधायकों के आधार पर ही फैसला होगा।

Áसदन शुरू होने के बाद पहले फ्लोर टेस्ट होगा या राज्यपाल का अभिभाषण?

- अभी तक की स्थिति में राज्यपाल का अभिभाषण ही होगा। यदि कोई और निर्देश आता है तो पहले फ्लोर टेस्ट भी हो सकता है। Áराज्यपाल के अभिभाषण पर बहस कितनी देर हो सकती है?

- निर्णय स्पीकर और कार्य मंत्रणा समिति करती है। वैसे अमूमन एक से दो दिन में बहस हो जाती है।

सिंधिया भाजपा, दिग्विजय कांग्रेस से राज्यसभा प्रत्याशी
पाॅलिटिकल रिपोर्टर | भोपाल/नई दिल्ली

प्रदेश की कमलनाथ सरकार पर भ्रष्टाचार का उद्योग चलाने का आरोप लगाते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में शामिल हो गए। बुधवार को भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाते हुए कहा- ‘ज्योतिरादित्य के नेतृत्व और प्रखरता से हम वाकिफ हैं, मोदी के नेतृत्व में उन्हें मुख्यधारा में काम करने का मौका मिलेगा।’ सिंधिया ने 10 मिनट के बयान में कांग्रेस छोड़ने का कारण तो बताया ही, पीएम नरेंद्र मोदी को सबसे सशक्त नेता भी बताया। उन्होंने 4 बार मोदी का नाम लिया, लेकिन मप्र में भाजपा के प्रमुख नेता शिवराज सिंह चौहान का नाम नहीं लिया। जबकि, शिवराज ने भोपाल में सिंधिया की बुआ भाजपा नेता यशोधराराजे सिंधिया के साथ पत्रकारों से बात करते हुए ज्योतिरादित्य की तारीफ की। ट्वीट भी किया- ‘स्वागत है महाराज, साथ है शिवराज।’ सिंधिया भाजपाई हुए, इधर भोपाल में भाजपा ने सिंधिया को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया, वहीं कांग्रेस ने दिग्विजय को। सूत्र कह रहे हैं कि सिंधिया मोदी सरकार में मंत्री बनाए जा सकते हैं। इसी शर्त पर सिंधिया भाजपा में आए हैं।े कमलनाथ सरकार चलेगी या नहीं, 22 सिंधिया समर्थकों के इस्तीफे कब स्वीकारना है। यह अब स्पीकर के विवेेक पर निर्भर करेगा। -विशेष पेज 11 पर

चार संभावनाएं, लेकिन सफल वही होगा जिसके पास संख्या ज्यादा होगी
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भास्कर के लिए विधायी विषयों के एक्सपर्ट सुभाष कश्यप बता रहे हैं, आने वाले दिनों में बनने वाली हर स्थिति और उसका असर

अब तक कांग्रेस के 114 में से 22 विधायकों ने इस्तीफे दिए हैं। यदि इन्हें स्वीकार किया गया, तो विधानसभा में सदस्यों की प्रभावी संख्या 206 पहुंच जाएगी। कांग्रेस की संख्या 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद 92 रह जाएगी। भाजपा विधायकों की संख्या 107 है। चार निर्दलीय, दो बसपा व एक सपा विधायक हैं, जो कांग्रेस को समर्थन कर रहे हैं। यदि वे समर्थन देते रहें, तब भी संख्या 99 होगी। राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होना है। नई स्थिति में एक सीट जीतने के लिए 52 वोटों की जरूरत होगी। भाजपा आसानी से दो सीट जीत सकती है। कांग्रेस को दूसरी सीट जीतने के लिए पांच 5 और वोटों की जरूरत होगी। एेसे में तोड़-फोड़ की संभावनाओं को बल मिल सकता है।

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