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सांसद तो बना देते पर उ नकी अतिमहत्वाकांक्षा पूरी नहीं कर पाते

एक वर्ष पहले
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क्या इन हालात में सरकार बचेगी?

अरे, 100 परसेंट। सरकार बचेगी, हम फ्लोर टेस्ट भी पास करेंगे। आपने आज देखा नहीं जो आज जीतू के साथ बैंगलुरू में हुआ। हमारे विधायकों को भाजपा ने बंधक बनाकर रखा है। मैंने जो आरोप लगाए थे, वो सही निकले। मैं बगैर सोचे समझे कुछ बोलता नहीं हूं।

भोपाल । पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को सांसद तो कांग्रेस पार्टी बना देती, उन्हें केंद्र में मंत्री नहीं बनवा पाती। सिंधिया मंत्री बनने के लिए भाजपा में गए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के विधायकों की संख्या के हिसाब से राज्यसभा में दो सांसद तो चुन लिए जाते, लेकिन उनकी अति महत्वाकांक्षा को हम पूरा नहीं कर पाते।

Á आप तो यही दोहरा रहे थे कि मप्र में कोई गुटबाजी नहीं है?

(हंसते हुए) मुझसे क्या उम्मीद करते हैं कि मैं कहूंगा कि कोई गुटबाजी नहीं है। हां, प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी है। गुटबाजी दूर करने के लिए सब जुटे हुए हैं।

Á राज्यसभा में जाने को लेकर प्रतिद्वंद्विता के कारण ये संकट खड़ा हुआ?

नहीं, राज्यसभा जाने में कोई दिक्कत नहीं थी। ये सब मंत्री बनने के लिए हुआ है। सिंधिया को राज्यसभा तो हमी भेज देते, लेकिन हम उनको मंत्री नहीं बना सकते थे। राज्यसभा में उनको भी टिकट दे देते, मुझको भी दे देते, दोनों हो जाते। कांग्रेस प्रेसीडेंट कहती कि दिग्विजय तुमको नहीं सिंधिया को राज्यसभा में भेजना है तो मुझे क्या दिक्कत होती।

Áलोग कह रहे हैं कि प्रदेश में इस राजनीतिक संकट के लिए दिग्विजय सिंह जिम्मेदार हैं?

- इसके लिए मैं कैसे जिम्मेदार हूं। राजनीतिक संकट के लिए जो जिम्मेदार हैं, वे सब सामने तो आ गए हैं। आखिर किसी को भी दिक्कत क्या थी, जब सारी बातें मानी जा रही थी। अफसरों की पोस्टिंग पसंद के हिसाब से की जा रही थी, जो कहा जा रहा था पार्टी पूरा कर रही थी। अतिमहत्वाकांक्षा तो पूरी नहीं की जा सकती।

Á कोई जिम्मेदार नहीं तो ये परेशानी कैसे शुरू हुई?

- इसकी शुरुआत सिंधिया के लोकसभा चुनाव हारने के बाद शुरू हुई। वे इससे व्यथित हो गए थे।

Á सरकार गिरती है तो क्या कांग्रेस मध्यावधि चुनाव में जाना चाहेगी?

- बिल्कुल, हम पूरी तरह से तैयार है। फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार हैं, मध्यावधि चुनाव के लिए तैयार हैं। हम हर तरह के चुनाव के लिए तैयार हैं। आखिर कांग्रेस प्रजातांत्रिक पार्टी है।

Á समय रहते यदि सिंधिया को पीसीसी चीफ बना दिया होता, तो ये नौबत नहीं आती। आप क्या सोचते हैं?

- पीसीसी चीफ बनाने के लिए तो पार्टी तैयार थी, लेकिन वे खुद अध्यक्ष बनना नहीं चाहते थे। वे किसी और को पीसीसी चीफ बनवाना चाहते थे। मैं नहीं मानता कि सिंधिया की कोई मांग पार्टी ने नहीं मानी। उनकी हर मांग मानने के लिए पार्टी तैयार थी, लेकिन अतिमहत्वाकांक्षा कैसे पूरी की जा सकती है।

Á पार्टी ने आपका नाम घोषित नहीं किया और आप राज्यसभा का नामांकन भरने चले गए?

-हां, मुझसे पार्टी प्रसीडेंट ने नामांकन भरने के लिए कह दिया था।

कांग्रेस का दामन छोड़ भाजपा में जाने के सिंधिया के फैसले पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय बोले-

भास्कर इंटरव्यू**
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