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- Bhopal News Mp News This Time The Emphasis On Holi Of Natural Colors And Flowers
इस बार प्राकृतिक रंगों और फूलों की होली पर जोर
राजधानी के समीप ग्राम बांसिया में रहने वाले नेपाल सिंह पेशे से दुकानदार हैं। लेकिन इस बार उनके पास एक अलग काम का आॅर्डर आया है। शहरी क्षेत्र में रहने वाले उनके परिचितों ने उनसे पलाश के फूलों की मांग की है। नेपाल ने कारण पूछा तो उन्हें बताया कि इस बार होली पलाश के फूलों से खेली जाएगी। दरअसल जब तक मार्केट में आर्टिफिशयल रंग नहीं आए थे तो गांव में पलाश के फूल को पीसने के बाद उसे छानकर रंग बनाया जाता था। होली के समय पलाश के फूलों से पेड़ लद जाते हैं। लेकिन इस बार यह मांग और अधिक बढ़ गई है। केवल पलाश के ही नहीं, बल्कि कई प्रजातियों के फूलों की भी अच्छी डिमांड है। फूलों के होलसेल व्यापारी सुनील माली ने बताया कि मार्च में फूलों की जबरदस्त आवक होती है और इस बार इनकी मांग भी अच्छी है। क्योंकि कोरोना वायरस के कारण लोग फूलों से ही होली खेलने का मन बना चुके हैं। इस कारण गुलाब के फूल 100 से 150 रुपए किलो तक बिक रहे हैं, जबकि नौरंगा और सफेद फूल के भाव में ठहराव है।
कुछ सामाजिक संगठनों ने परंपरागत तरीके से होली मनाने का मन बना लिया है। ये लोग पलाश और विभिन्न प्रजाति के फूलों से बने रंगों का इस्तेमाल करेंगे। वहीं कुछ संगठन फूलों से होली खेलेंगे। अचानक बाजार में हर्बल रंगों की मांग बढ़ गई है, लेकिन पूर्ति नहीं हो पा रही है। >शेष पेज 3 पर
केमिकलयुक्त रंगों से नहीं खेलेंगे
हर साल हमारा संगठन दो से तीन क्विंटल फूलों से होली मनाता आया है। इस साल भी यह सिलसिला जारी रहेगा। हम केमिकलयुक्त रंगों का इस्तेमाल नहीं करते हैं।
नीलम विजयवर्गीय, उपाध्यक्ष, महिला मंडल विजयवर्गीय समाज
पलाश के फूलों से खेलेंगे होली
पुराने समय की होली प्राकृतिक व सुरक्षित होती थी। इसलिए इस बार कोरोना वायरस के कारण ही सही, लेकिन पलाश के फूलों से रंग बनाकर होली खेलेंगे। घर पर पकवान बनाएंगे और बांटेंगे।
अंशुल अग्रवाल, रहवासी, कोलार क्षेत्र
रंगों के पर्व होली पर चीन के कोरोना वायरस का खतरा मंडरा रहा है। संक्रमण के भय से अधिकांश लोगों ने रासायनिक रंगों से तौबा कर ली है। उन्होंने प्राकृतिक रंगों और फूलों की होली खेलने का निर्णय लिया है। इसके चलते राजधानी में फूलों की मांग बढ़ गई है और अचानक दाम में भी इजाफा हो गया है।**