बैलों से कुचलवाकर निकाल रहे ज्वार के दाने, लग रहा समय

Badwani News - पाटी | पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी किसान पुरानी परंपरा अनुसार ही खेती कर रहे हैं। खेत की फसल काटने के बाद फसल निकालने...

Dec 04, 2019, 09:57 AM IST
पाटी | पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी किसान पुरानी परंपरा अनुसार ही खेती कर रहे हैं। खेत की फसल काटने के बाद फसल निकालने के लिए खला की पूजाकर बैलों से कुचलवाकर ज्वार निकाल रहे हैं। इससे अधिक समय लग रहा है। जबकि अब ट्रैक्टर व थ्रेसर जैसे संसाधन आ गए हैं। इसके बाद भी पहाड़ी क्षेत्र में किसान अभी भी पुरानी परंपरा अनुसार ही खेती कर रहे हैं। बुजुर्ग लोगों का कहना है कि सदियों पहले मशीनरी तकनीकी संसाधन नहीं होने के कारण ग्रामीण क्षेत्र के लोग फसल को निकालने के लिए अलग-अलग तकनीकी अपनाते थे। ज्वार को खेत से काटने के बाद एक जगह इकट्ठा कर ज्वार के ठोसे की माला बनाकर इकट्ठा करते हैं। सूखने के बाद इसे बैलों से कुचलवाकर दाना निकलते हैं। किसान गंगाराम पिता छनजिया डावर, ज्ञानसिंह गंगाराम निवासी ठेंचा ने बताया कम मात्रा में ज्वार होने से इसका दाने पुरानी पद्धति से निकाल रहे हैं। अधिक मात्रा में होने पर ट्रैक्टर से थ्रेसर से निकालते हैं।

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