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आज समय ऐसा आया है कि न एलोपैथी काम करती है न होम्योपैथी, कारगर है ताे सिम्पैथी
नाट्य प्रस्तुति
नाटक के वे संवाद जाे हंसाते-कटाक्ष करते हैंं
काका कहते हैं-
{आज समय ऐसा आ गया है कि न एलोपैथी काम करती है न होम्योपैथी, थोड़ी बहुत कारगर है ताे सिम्पैथी।
{आज के कॉन्वेंट युग में हिंदी तो लोगों को ढंग से आती नहीं है, एेसे में संस्कृत तो समझ के परे है। इनको आसानी से बेवकूफ बना सकते हैं।
निठल्ला कहता है-
{श्रीमद् भगवद् गीता किसने लिखी, क्या सच मैं कृष्ण ने अर्जुन से कहा, जिसे व्यासजी ने लिखा। इस उपदेश का मतलब यह हुआ कि अर्जुन ज्ञानी हो गया और लड़ने के लिए तैयार हो गया। यानी ज्ञानी वो, जो हमेशा लड़ने के लिए तैयार रहे।
60 के दशक में दो पीढ़ियों के अंतर्द्वंद्व काे रेखांकित करता अाैर अाज भी प्रासंगिक व हास्य के साथ कटाक्ष करता नाटक निठल्ले की डायरी गुरुवार काे रवींद्र भवन में खेला गया। 35वें अर्जुन सिंह रंगोत्सव राष्ट्रीय नाट्य समारोह के तहत मंचित यह नाटक हरिशंकर परसाई लिखित है, जिसका नाट्य रूपांतरण और निर्देशन अरुण पाण्डेय ने किया है। 60 के दशक में सरकारी अस्पताल का भ्रष्टाचार, पीडब्ल्यूडी, शिक्षा, भ्रष्टाचार पर लिखे गए लेख आज भी ज्यों के त्यों हैं। नाटक की एक खास बात रही कि यह अब तक करीब 800वीं बार मंचित किया जा चुका है अाैर यह अपना सिल्वर जुबली वर्ष मनाने वाला है। नाटक में पर्दे काे प्रतीकात्मक ढंग से दिखाया गया, जाे किसी साहब के घर, अस्पताल सहित अन्य स्थान काे रेखांकित करते हैं। इसमें गाै रक्षा आंदोलन, अस्पतालाें की व्यवस्था अाैर लाचार मरीज़, भ्रष्ट सरकारी व प्रशासनिक तंत्र, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, पटरी से उतर चुकी शिक्षा व्यवस्था पर तंज कसा गया।
1996 से काका का किरदार निभा रहे नवीन
नाटक में साल 1996 से काका का किरदार निभा रहे नवीन चौबे ने बताया कि यह नाटक पहली बार जबलपुर में मंचित हुआ था। इसके करीब 800 मंचन हो चुके हैं। मुझे 24 साल हो गए हैं इस नाटक से जुड़े हुए। कि साल 1999-2000 में इस नाटक का मंचन मुंबई में हुआ। आज तक इस नाटक में ढाई से तीन हजार कलाकार अभिनय कर चुके हैं, लेकिन मैं आज 65 साल का हूं। 40 साल का था तब से काका का किरदार निभा रहा हूं। कहानी की शुरुआत काका के किरदार से होती है जो बड़े-बुजुर्ग होने के साथ ही सूचना के बड़े स्राेत हैं। मोहल्ले में लड़की के नैन मटक्के से लेकर ट्रंप ने आज जो कहा उन्हें वह भी पता होता है। वहीं दूसरा किरदार निठल्ला होता है, जिसे काका अलग-अलग काम बताते रहते हैं। वही निठल्ला (सूत्रधार) एक कहानी से दूसरी कहानी में ले जाने का काम करता है।