सूना शहर, सूनी गली, पर कोरोना से हार नहीं मानेंगे...

Shivpuri News - बिना कुदरत की मर्जी के कयामत हो नहीं सकती... ओज कवियित्री वैशाली पाल ने कहा- बिना कुदरत की मर्जी के कयामत हो...

Mar 27, 2020, 08:40 AM IST

बिना कुदरत की मर्जी के कयामत हो नहीं सकती...

ओज कवियित्री वैशाली पाल ने कहा- बिना कुदरत की मर्जी के कयामत हो नहीं सकती, जब तक रब नहीं चाहे, हिफाजत हो नहीं सकती। ग्वालियर की शायरा राणा जेबा के संचालन में कवि सम्मेलन प्रारम्भ हुआ। इसमें उन्होंने काव्य पाठ करते हुए कहा कि ये तेरे मेरे मिलने का पल आखिरी नहीं, ये आगरे का ताजमहल आखिरी नहीं। समीक्षा भार्गव ने कोरोना से लड़ने का संकल्प दोहराते हुए अपनी कविता भाई को समर्पित करते हुए कहा कि, हाथ थामकर चलना सिखाया, जिंदगी के हर सुख दुख में मेरा साथ निभाया। कवियत्री दिव्या भागवानी ने जो माटी खाकर आई है कविता सुनाई। कवि आलोक शुक्ला ने- रावण अभी मरा नहीं, घर मे वह अभी जिंदा है, के साथ कोरोना से लड़ना है रचना सुनाई। इंदौर की प्रांशुल शर्मा ने कहा- ले रहा है वक्त करवट आप गुम हो जाएंगे, और तख्तों ताज सारे धूल में मिल जाएंगे। इसके अलावा रमन शर्मा ,पल्लवी गोयल , सुनील बंसल सुरेंद्र सागर, कवि संजय मिर्जा, संजय शाक्य ने भी काव्य पाठ किया।

शिवपुरी|सूना शहर, सूनी गली, मुख पर मुखोटे, दिल में भय, पर हार नहीं मानेंगे, कोरोना से जंग जीतकर दिखाएंगे। यह पंक्तियां शहर के युवा कवि मयंक राठौर ने साहित्यकारों द्वारा बनाए गए ऑनलाइन कवि सम्मेलन ग्रुप पर सुनाकर शहर के हालातों काे बयां किया। दरअसल, साहित्यकारों ने ऑनलाइन कवि सम्मेलन की नई शुरुआत की है। इसके तहत अब लॉक डाउॅन के पूरे 21 दिन यह आयोजन चलेगा। इसमें घर बैठे कवि सम्मेलन में एक क्लिक पर आप भी इसमें शामिल हो सकते हैं। रसिक श्रोता हैं तो कवि सम्मेलन सुन सकते हैं और यदि कविताएं लिखते हैं तो आप भी इसमें अपनी भी रचनाएं लिख सकते हैं। कोरोना से लड़ने का संकल्प लेते हुए घर रहकर कैसे साहित्यकार लोगों को जागरुक करने के साथ अपने काव्य का विस्तार करें इसलिए ओज कवि आशुतोष शर्मा ने यह योजना बनाई। इसमें शिवपुरी के साहित्यकारों के साथ अंचल के कई कवियों और शायरों की भागीदारी है। जो न केवल समसामयिक विषयों पर अपनी रचनाएं लिखेंगे बल्कि कोरोना वायरस से शहर के हालात, इससे बचाव, सावधानियां, लोगाें में भय पैदा न हों अाैर हल्का फुल्की हास्य व्यंग्य रचनाओं से वह श्रोताओं को मनोरंजन के साथ जानकारी प्रदान करेंगे। शाम 7 बजे से यह कवि सम्मेलन रात 10 बजे तक चलता है। इसकी तैयारी दिन भर कवि करते हैं और रात में तैयारी के साथ अपना काव्य पाठ प्रस्तुत करते हैं। इसमें वह अपना रचना पाठ ग्रुप में रिकॉर्ड कर भेजते हैं।

इस तरह वह अपने घर पर रहते हुए भी न तो एक दूसरे से दूर हुए और न ही ऑनलाइन बातचीत हो जाने से उनकी मुलाकातें बंद हुई। यानि बंद के समर्थन में खुद को व्यस्त रखने के साथ लोगों के मनोरंजन का यह अदभुत आयोजन है। इससे न उनकी गोष्ठियां बंद हुई और न ही मेलजोल।

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