फाइलिंग अासान बनाने लीगल साइज दस्तावेज का ही उपयोग
हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील दलाल के बताते हैं टाइपराइटर आने से पहले दस्तावेज हाथ से लिखे जाते थे। बाद में मैकेनिकल टाइपराइटर आए। दोनों स्थिति में अकसर एक तरफ टाइप की गई इबारत दूसरी तरफ उभर जाती थी। इससे पढ़ने में होने वाली असुविधा से बचने के लिए एक ही तरफ टाइप करने का नियम बनाया था। फाइलिंग में आसानी की दृष्टि से भी पेपर का आकार लीगल रखा जाता रहा। कम्प्यूटर टाइपिंग आने से यह समस्या खत्म हो गई। बावजूद टाइपराइटर के जमाने की परंपरा चली आ रही है। अब इस निर्णय से खर्च में भारी बचत होगी।