महिलाएं घर पर मिट्‌टी के शिव (गण) व पार्वती (गौर) बनाकर करें पूजन

News - गणगौर पूजन नवरात्र के तीसरे दिन चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया यानी शुक्रवार को है। गणगौर पूजा चैत्र मास के कृष्ण...

Mar 27, 2020, 06:42 AM IST

गणगौर पूजन नवरात्र के तीसरे दिन चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया यानी शुक्रवार को है। गणगौर पूजा चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि से आरंभ की जाती है। इसमें कन्याएं और विवाहित स्त्रियां मिट्टी के गण (शिव) व गौर (माता पार्वती) बनाकर पूजन करती हैं। रंगबिरंगी संस्कृति का अनूठा उत्सव गणगौर कोरोना वायरस के चलते इस बार भले ही बड़े स्तर पर न मनाया जाए, लेकिन महिलाएं घरों में इसे पूरे उत्साह के साथ मनाएंगी। इस बार महेश्वरी, स्वर्णकार और गुर्जर समाज ने अपने सभी सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। इसके चलते शुक्रवार को महिलाएं घर पर ही गणगौर की पूजा करेंगी। महिलाएं सुबह स्नान करके गीले वस्त्रों में घर के ही किसी पवित्र स्थान पर लकड़ी की बनी टोकरी में जवारे बोएंगी। जब तक गौरी का विसर्जन नहीं हो जाता (करीब आठ दिन) तब तक प्रतिदिन दोनों समय गौरी की पूजा कर उन्हें भोग लगाएंगी।

अच्छे वर के लिए कुंवारी कन्या भी करती है पूजा

गणगौर पर्व हर स्त्री द्वारा मनाया जाता है। इसमें कुंवारी कन्या से लेकर विवाहित महिलाएं भगवान शिव व माता पार्वती का पूजन करती हैं। मान्यता है कि शादी के बाद पहला गणगौर पूजन मायके में किया जाता है। इस पूजन का महत्व अविवाहित कन्या के लिए अच्छे वर की कामना को लेकर रहता है, जबकि विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए पूजन करती हैं।

लकड़ी की बनी टोकरी में जवारे बोएंगी। जब तक गौरी का विसर्जन नहीं हो जाता (करीब आठ दिन) तब तक प्रतिदिन दोनों समय गौरी की पूजा कर उन्हें भोग लगाएंगी।

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