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आपको शर्म नहीं आती- किसी अबला मर्द पर हाथ उठाते हैं क्या…

एक वर्ष पहले
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यह है कहानी

{शहीद भवन में पांच दिवसीय रंग त्रिवेणी नाट्य उत्सव के तहत रविवार काे दाे नाटकाें का मंचन किया गया। पहली प्रस्तुति तिरिछ की अाैर दूसरी प्रस्तुति अाेरछाधीश की रही।

दोनों नाटकों की कहानी

ओम द्विवेदी द्वारा निर्देशित तिरिछ उदय प्रकाश की चर्चित कहानी है। जिसमें एक बेटा अपने पिता की चुप्पी में छुपे दर्द का किस्सा सुनाता है। वे एक बार वह शहर जाते हैं। वहां लोग पागल व जासूस समझकर उनसे मारपीट करते हैं, जिससे उनकी मौत हो जाती है।

वहीं अनूप शर्मा निर्देशित ओरछाधीश ओरछा में स्थित राजा राम मंदिर की स्थापना से पहले की कहानी दिखाई गई। इसमें राम के वनवास के समय राम कौशल्या को अपनी प्रतिकृति भेंट करके जाते हैं। दशरथ की अंतिम अवस्था में विष्णु उन्हें और कौशल्या को कलयुग में अवतार का वरदान देते हैं। राजा मधुकर शाह के रूप में दशरथ अवतार लेते हैं।

सिटी रिपोर्टर . भोपाल

मैं किसी महिला पर हाथ नहीं उठाता, लेकिन मैं तो पुरुषों पर हाथ उठाती हूं...। आपको शर्म नही आती किसी अबला मर्द पर हाथ उठाते हैं क्या...? बुलाओ पुलिस…, बुलाओ...। आपकी वजह से मेरी मैग्जीन बंद हो जाएगी। अगर आप प्रेम काे देखकर थाेड़ा मुस्कुरा देती हाे तो उसकी बांछे खिल जाती हैं। कुछ ऐसे ही हास्य संवादों का साक्षी बना भारत भवन का अंतरंग सभागार। मौका था रविवार को यहां मंचित नाटक पडोसन का। रंगमंडल की अतिथि नाट्य प्रस्तुति के तहत इस नाटक का मंचन किया गया। नील साइमन लिखित नाटक द स्टार स्पैंगल्ड गर्ल पर केंद्रित इस नाटक का निर्देशन प्रियंका शर्मा ने किया। नाटक की प्रस्तुति सिली सोल्स थिएटर ग्रुप नई दिल्ली के कलाकारों ने दी। नाटक किसी 90 के दशक की फिल्मी स्टोरी से कम नहीं था।

नाटक के तीन किरदार फिल्मों से प्रभावित हैं। इनमें दो दोस्त अंकुश और प्रेम एक मैग्जीन चलाते हैं। अंकुश चालू लड़का है, वो बहुत प्रैक्टिकली है। मैग्जीन में लिखने का जिम्मा प्रेम का है और उसकी मार्केटिंग की जिम्मेदारी अंकुश की होती है। इसी बीच अंकुश और प्रेम के पडोस में एक पंजाबी लड़की सोनी आकर रहने लगती है। सोनी को लेकर अंकुश व प्रेम के बीच कुछ गलतफहमियां हो जाती है। हास्य भरे संवादों के बीच नाटक अागे बढ़ता है और अंत में अंकुश को सोनी मिल जाती है।

शहीद भवन में नाटक तिरिछ अाैर अाेरछाधीश का मंचन
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