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वामा तुम करो प्रतिज्ञा, अत्याचार न सहोगी...

एक वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर | अमृतांजलि काव्य गोष्ठी में शहर के चुनिंदा कवि-कवयित्रियों ने स्त्री केंद्रित कविताअों का पाठ किया। हंसा मेहता ने कविता पढ़ी कि वामा तुम करो प्रतिज्ञा अत्याचार न सहोगी/तुम मां हो, पुत्री तुल्य बहू को बेटी मानोगी/तुम चण्डीक, तुम शक्ति स्वरूपा, तुम देवी रूप ज्ञान की/ज्ञानाचार की बात करोगी, जन जन का उद्धार करोगी। इसके बाद विनीता सिंह चौहान ने रचना सुनाई एक नारी प्यार देने वाली ममता प्रदायिनी हूं, मैं ही आदम की हव्वा, जग में जीवनदायिनी हूं, मैं ही शृंगार रस में भीगी, प्रसाद की कविताएं कामायनी हूं। नेहरू पार्क में की गई इस गोष्ठी में मुकेश इन्दौरी ने गज़ल मां दादी काकी नानी बुआ मौसी कितने रूप/नारी शक्ति के दम पर ही दुनिया भर में उजाला है सुनाई। महेन्द्र जैन ने तेरे कदमों से बढ़कर मां कोई इबादत हो नहीं सकती/बिना तेरी दुआओं के जन्नत मिल नहीं सकती सुनाई। मधुर मनोहर ने फागुन मस्त महीना मौसम अलबेला दीवाना/बचकर कोई जाने न पाए रंगों की बौछारों से कविता सुनाई।
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