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डाउनलोड करेंभोपाल. एमपी बोर्ड की हायर सेकेंडरी और हाईस्कूल बोर्ड के 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं के नतीजे घोषित हो गए। बोर्ड परीक्षाओं में फेल होने पर प्रदेश में 8 छात्र-छात्राओं ने खुदकुशी कर ली। जबकि 10 से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने खुदकुशी की कोशिश की। सरकार की तमाम योजनाओं और काउंसिलिंग के प्रयासों के बाद भी सुसाइड नहीं रुक रही हैं। 2017 में सतना में दो सगे भाई-बहन और भोपाल में एक छात्र समेत करीब 10 बच्चों ने रिजल्ट देखने के बाद सुसाइड कर लिया था।
रिजल्ट देखने के बाद दसवीं की छात्रा ने फांसी लगाई
-भोईपुरा निवासी ऑटो चालक नीलेश रैकवार की 17 वर्षीय बड़ी बेटी भावना कक्षा दसवीं की छात्रा थी। दो दिन पहले भावना की चचेरी बहन की शादी थी। रविवार रात ही सभी छोला क्षेत्र में हुए वैवाहिक कार्यक्रम से भोईपुरा लौटे हैं। सोमवार सुबह 11 बजे भावना ने दसवीं का रिजल्ट देखा। वह तीन विषयों में पास नहीं हो सकी थी। दो भाइयों को घर के बाहर खेलता छोड़कर दोपहर 12 बजे उसने कमरे में जाकर फांसी लगा ली।
सीहोर में दो छात्राओं ने की खुदकुशी
-सीहोर जिले के टीकामोढ़ गांव की कक्षा दसवीं की छात्रा किरण कोरकू (16) ने अंग्रेजी व गणित विषय में पूरक आने पर जहरीला पदार्थ खा लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके अलावा अमलाहा निवासी कक्षा 10वीं की छात्रा नेहा चौहान ने फेल होने पर घर में पंखे की राड पर फंदा बनाकर फांसी लगा ली।
सफलता नहीं मिली तो दे दी जान
-भिंड के कीरतपुरा निवासी नकुल सिंह भदौरिया की 20 साल की बेटी स्वाति भदौरिया ने इस बार 12 वीं की परीक्षा दी थी। वह फेल हो गई। उसने जहर खा लिया। जिला अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया। भिंड निवासी धीरेंद्र सिंह राजावत की 17 वर्षीय बेटी अनुराधा ने भी दसवीं में फेल होने पर जहर खा लिया। उसकी मौत हो गई। खिदरापुरा गांव के सतेंद्र वर्मा ने हाईस्कूल में फेल होने पर जहरीली गोलियां खाकर आत्महत्या का प्रयास किया। उसका भिंड में भर्ती कराया गया है।
छतरपुर, उज्जैन में दो ने की सुसाइड
-छतरपुर के खजुराहो 12वीं की छात्रा शिवानी विश्वकर्मा ने दो विषय में फेल होने से दुखी होकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उज्जैन के महिदपुर रोड निवासी विनय शर्मा ने सोमवार को घर के पीछे वाले कमरे में दुपट्टे का फंदा बनाकर फांसी लगा ली। वह दसवीं में फेल हो गया था।
दमोह में भी सुसाइड की कोशिश
-राज्य का दमोह जिला भी परीक्षा परिणामों के बाद सुसाइड की घटना से अछूता नहीं रहा। यहां 12वीं की छात्रा पूजा अहिरवार ने जहर खाकर आत्महत्या की कोशिश की. पूजा को भी गंभीर हालत में इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है।
बच्चों को प्रताडि़त कर रहे हैं स्कूल और पेरेंट्स
- देश के लिए सुसाइड प्रिवेंशन पॉलिसी तैयार करने वाले साइकोलॉजिस्ट डॉ. रामनारायण साहू का कहना है कि बच्चों का फेल होना समस्या नहीं है, बस उन्हें डिप्रेशन में जाने से रोकना होगा। शायद इसे रोका जा सकता है। माता-पिता की बच्चों से बढ़ती अपेक्षाएं, स्कूल में पढ़ाई का बोझ। ये सब मिलकर प्रताड़ना का कारण बन जाता है, वहीं से सुसाइड का रुख कर जाते हैं।
उस क्षण को पकड़ने की जरूरत है
-MP बोर्ड के काउंसलर गौरव श्रीवास्तव ने कहा की परीक्षा देने के बाद या ऐसी स्थिति जिस वजह से छात्र सुसाइड करने जा रहा है, उस क्षण को पकड़ने की जरूरत होती है। जिसमें बच्चे सुसाइड करने का फैसला करते हैं। काउंसिलिंग के दौरान हम यही प्रयास करते हैं कि उनकी काउंसिलिंग से उनके मन से डर को दूर किया जा सके। इसके लिए कई बैठकों में काउंसलिंग होती है। इसके लिए पेरेंट्स को भी जागरूक रहने की जरूरत है।
अच्छे नंबर सफलता की गारंटी नहीं, कम नंबर वाले भी बने महान : सीएम
-मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बोर्ड परीक्षाओं से ठीक पहले दिल से बातचीत में दसवीं और बारहवीं के छात्र-छात्राओं से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि सिर्फ अच्छे नंबर लाना या प्रथम आना ही सफल होने की गारंटी नहीं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, बॉक्सर मैरीकॉम, सचिन तेंदुलकर, अमेरिका के प्रथम राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन जैसे कई महान लोग हैं, जिनके कम नंबर आए। इसके बावजूद उन्होंने दुनिया में सफलता हासिल की।
-तकनीकी शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री दीपक जोशी ने विद्यार्थियों से आग्रह किया है कि किसी कारणवश यदि रिजल्ट मनवांछित नहीं आता है, तो इससे निराश नहीं हों। रिजल्ट ठीक नहीं आने से मात्र एक वर्ष खराब होता है, जीवन नहीं। अत: अपना जीवन दांव पर नहीं लगाएं। विद्यार्थी हमेशा यह ध्यान रखें कि आपका एक गलत कदम आपके माता-पिता के लिए कितना अधिक दुखदायी हो सकता है।
सतना में दो सगे भाई-बहनों समेत करीब 12 छात्रों ने की सुसाइड
-2017 में सतना में दो सगे भाई-बहन और भोपाल में एक छात्र समेत करीब 10 बच्चों ने सुसाइड किया। पिछले साल जब कोटा में बच्चों द्वारा आत्महत्या किए जाने का मामला तूल पकड़ा था, तो मध्यप्रदेश की विधानसभा ने विधायक अर्चना चिटनिस की अध्यक्षता में विधायकों की एक कमेटी स्थिति का अध्ययन करने के लिए बनाई थी। कमेटी के सामने बच्चों की आत्महत्या के जो आंकड़े सामने आए वे चौंकाने वाले थे। वर्ष 2011 में कुल 175 छात्रों ने आत्महत्या की थी. वर्ष 2015 में यह संख्या बढ़कर 248 हो गई।
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