Hindi News »Business» Msp Hike May Lead To Inflation Rise Says Abheek Barua

अभीक बरुआ का कॉलम: एमएसपी के मुताबिक खरीद पर निर्भर ग्रामीण आमदनी

समर्थन मूल्य बढ़ने से महंगाई का दबाव बढ़ने के आसार

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jul 13, 2018, 11:36 AM IST

अभीक बरुआ का कॉलम: एमएसपी के मुताबिक खरीद पर निर्भर ग्रामीण आमदनी
सरकार ने पिछले हफ्ते खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित कर दिया। एमएसपी बढ़ने से इकोनॉमी में महंगाई का दबाव बढ़ने के आसार हैं। रिजर्व बैंक भी अगस्त की मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरें बढ़ा सकता है। ज्यादा एमएसपी से ग्रामीण इलाकों में आमदनी बढ़ेगी। फसलों की लागत तय करने ए2+एफएल का फार्मूला चुना गया। इसमें इनपुट की लागत के साथ फैमिली लेबर यानी किसान परिवार के श्रम को भी जोड़ा जाता है। इसी आधार पर लागत का डेढ़ गुना एमएसपी तय किया गया है। धान के लिए एमएसपी लागत की तुलना में पिछले साल 39% ज्यादा थी, जिसे बढ़ाकर 50% किया है। मोटे अनाज में ज्वार का एमएसपी लागत की तुलना में 9% से बढ़कर 50% ज्यादा हुआ है। मूंग, तुअर और उड़द जैसी दालों के समर्थन मूल्य में औसतन 11% वृद्धि हुई है। बाजरा में 37% और सोयाबीन में 11.4% बढ़ोतरी की गई है।
बाजार में फसलों की कीमत एमएसपी से नीचे जाती है : एमएसपी में बढ़ोतरी से क्या ग्रामीण इकोनॉमी में रिवाइवल आएगा? इसका जवाब दो बातों पर निर्भर करता है। पहला, मानसून कैसा रहता है और दूसरा एमएसपी पर फसलों की कितनी खरीद होती है। अभी खरीद की प्रक्रिया असमान रहती है। ज्यादातर खरीद गेहूं-चावल की ही होती है, वह भी चुनिंदा इलाकों में। इसलिए एमसपी का लाभ सभी किसानों को नहीं मिलता है। पिछले साल अच्छे मानसून के बाद दालों की सप्लाई बढ़ी और दाम एमएसपी से नीचे चले गए। इससे किसानों को नुकसान हुआ। दाम घटने के बावजूद डिमांड नहीं बढ़ती है। इससे भी किसानों का नुकसान बढ़ता है। सरकार ने कहा है कि मार्केट एश्योरेंस स्कीम ला सकती है। एक और विकल्प भावांतर भुगतान योजना है जो मध्यप्रदेश में लागू है। तीसरा विकल्प निजी खरीद एवं स्टॉकिस्ट स्कीम है। इसका मकसद खरीद में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना है।
महंगाई बढ़ेगी, रिजर्व बैंक अगस्त तक महंगा कर सकता है कर्ज : ग्रामीण आमदनी के अलावा एमएसपी का असर महंगाई और ब्याज दरों पर भी दिखेगा। हमने इस साल के लिए महंगाई का अनुमान 5% से बढ़ाकर 5.3% किया है। रिजर्व बैंक ने महंगाई बढ़ने के जोखिम को लेकर जो आशंका व्यक्त की थी वह अब सामने है। इसलिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी भी निश्चित लग रही है। अगस्त की समीक्षा में हम रेपो रेट में 0.25% बढ़ोतरी की उम्मीद कर सकते हैं। रिजर्व बैंक ने अभी तक मौद्रिक नीति में अपना नजरिया 'न्यूट्रल' रखा है। इसे बदल कर वह 'सख्त' कर सकता है। इसका असर लिक्विडिटी पर दिखेगा। यानी बांड यील्ड में तेजी फिलहाल बनी रह सकती है। पॉलिसी रेट बढ़ना और लिक्विडिटी सरप्लस कम होना, इन दोनों के कारण यील्ड आगे ऊंची रह सकता है। साल के अंत में 10 साल वाले बेंचमार्क बांड की यील्ड 8.2% रहने के आसार हैं।
अभीक बरुआ, मुख्य अर्थशास्त्री, एचडीएफसी बैंक

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Business

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×