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डाउनलोड करेंइंदौर। रतलाम के अमृत सागर तालाब की जलकुंभी को गर्मी के पहले सफाई करके हटाने के नगर निगम के दावे की हवा निकल गई है। 10.71 लाख रुपए से होने वाली सफाई का ठेका निगम ने पवनपुत्र कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया था। तीन दिन सफाई करते हुए जलकुंभी निकाली भी लेकिन उसके बाद से काम बंद था। जो अब जाकर चालू हुआ है। इसमें भी गिनती के कर्मचारी ही सफाई कर रहे हैं। हालत यह है कि 95 फीसदी तालाब पर जलकुंभी है। बदबू से आसपास के रहवासी परेशान हैं। अधिकारी भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
26 करोड़ रु. का सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट फाइल में कैद
तालाब के सौंदर्यीकरण कर पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित करने का प्रोजेक्ट भी फाइल में कैद होकर रह गया है। 2011 में निगम ने सरकार की मंजूरी के बाद झील संरक्षण योजना में 40 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर राज्य शासन को भेजा था। लागत ज्यादा होने के बाद प्रोजेक्ट को रिवाइज कर 26.78 करोड़ का बनाया गया। राज्य शासन ने इसे प्रांरभिक स्वीकृति देकर अंतिम मूल्यांकन के लिए अलीगढ़ यूनिवर्सिटी भेजा था, जहां से अभी तक नहीं आया है।
कोई संस्था आगे नहीं आई
हर साल गर्मी शुरू होते ही कोई न कोई संस्था अमृत सागर की सफाई करती है, या फिर धरना और प्रदर्शन कर निगम पर सफाई का दबाव बनाती है। इस बार किसी संस्था ने पहल नहीं की है। दो साल पहले क्षेत्रीय पार्षदों ने मिलकर बड़े पैमाने पर सफाई की थी लेकिन फिर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
काम नहीं किया तो कार्रवाई होगी
ठेकेदार कंपनी को नोटिस दिया था। काम शुरू हो गया है। समय पर काम पूरा नहीं किया तो कार्रवाई करेंगे। - एपी सिंह, प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी
अमृत सागर पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाना चाहिए। इससे पानी भी साफ होता रहेगा और तालाब में हर साल होने वाली जलकुंभी की समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा। - शैलेंद्र डागा, पूर्व महापौर
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