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डाउनलोड करेंभोपाल. ट्रांसपोर्ट घोटाले की जांच की रिपोर्ट के लिए मैनिट ने जैसे ही 4 लाख 75 हजार रुपए का बिल थमाया तो निगम प्रशासन ने मौन साध लिया। इस बिल के बाद पिछले दो महीने से निगम अफसरों ने मैनिट के ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट आरके मंडलोई से रिपोर्ट के बारे में बात करना ही बंद कर दिया। सूत्र बताते हैं कि निगम की अकाउंट्स शाखा ने मंडलोई के बिल पर आपत्ति लगा दी है। इस आपत्ति में कहा गया है कि मैनिट से उस नियम की जानकारी ली जाए जिसके आधार पर वे यह राशि मांग रहे हैं।
प्री इनवाइस दी तब क्यों नहीं पूछा
मैनिट के एसोसिएट प्रोफेसर आरके मंडलोई ने बताया कि टेक्निकल रिपोर्ट के लिए निगम ने खुद संपर्क किया था। इसके बाद हमने एक प्री इनवाइस भी दी थी। प्री इनवाइस में नियमों की जानकारी है। इसके अलावा हमारी वेबसाइट पर भी नियम उपलब्ध हैं। जितने अमाउंट की जांच करते हैं हम उसका 10 प्रतिशत फीस के रूप में लेते हैं। निगम की 47 लाख 50 हजार रुपए की चुनिंदा फाइलों की जांच की है। उसका दस प्रतिशत 4 लाख 75 हजार रुपए होता है। हम अधिकतम 50 प्रतिशत तक फीस ले सकते हैं और यह राशि मैनिट के खाते में जमा होती है।
डीन को लिखा पत्र
नगर निगम की आयुक्त प्रियंका दास ने बताया कि हम इस संबंध में मैनिट के डीन को पत्र लिख रहे हैं। मैनिट ने गाइडलाइन के साथ बिल नहीं दिया है, जिससे यह साफ हो कि उन्हें एडवांस पेमेंट दिया जाना जरूरी है।
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