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नगर निकायों में हड़ताल का 7वां दिन: निजी एजेंसी कर्मियों को नहीं उठाने दिया जा रहा कचरा, एस्मा की चेतावनी बेअसर

3 वर्ष पहले
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पानीपत/रोहतक.  प्रदेश में नगर निकायों के 10 हजार सफाई कर्मचारी 7 दिन से हड़ताल पर हैं। इससे करीब 32 हजार टन से ज्यादा कचरा शहरों में सड़कों पर जमा हो चुका है, लेकिन कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। कर्मचारियों के आगे राज्य की भाजपा सरकार बेबस नजर आ रही है। हड़ताल से निपटने को दी गई एस्मा लगाने की चेतावनी का असर नहीं हुआ। प्रदेश के 4 से 5 शहरों में ही निजी एजेंसी के कर्मचारी थोड़ा-बहुत कचरा उठा पा रहे हैं, वह भी पुलिस बल साथ होने के बाद, क्योंकि हड़ताली कर्मचारी मौके पर पहुंचकर विरोध करते हैं। 

 

मांगों को माना नहीं जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी
मंगलवार को मुंख्यमंत्री मनोहर लाल खट्‌टर ने विदेश दौरे से लौटते ही बुधवार सुबह 10 बजे अपने आवास पर मीटिंग बुलाई है। वे अधिकारियों और कर्मचारी संघ के प्रतिनिधिमंडल से बात करेंगे। इधर, कर्मचारी संघ का कहना है कि मुख्यमंत्री के साथ वार्ता करने जाएंगे, लेकिन जब तक उनकी मांगों को माना नहीं जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।

 

कर्मचारियों की मांगें, कितनी पूरी करना संभव

- कर्मचारियों और सरकार के बीच से ठेकेदारों को हटाया जाए। 
- सरकार ठेकेदार हटाने में सक्षम है। कर्मचारियों को कांट्रेक्ट पर रखा जा सकता है।
- समान काम समान वेतन दिया जाए।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश हैं, समान काम समान वेतन दिया जाए। सरकार ऐसा कर सकती है। हर कर्मचारी को 5 से 6 हजार रुपए प्रतिमाह ज्यादा पैसा मिलेगा। हालांकि इससे सरकारी खजाने पर भार जरूर पड़ेगा।
- नौकरी की सुरक्षा की गारंटी दी जाए, किसी कर्मचारी को नहीं हटाया जाए।
- महकमे में कर्मचारियों के पद खाली हैं, जब तक नई भर्ती नहीं होती, तब तक इन्हें एडजस्ट किया जा सकता है। इन्हें नई भर्ती में छूट दे सकते है।
- कर्मचारियों को पक्का किया जाए।
- ऐसा फिलहाल संभव नहीं, क्योंकि 2014 की पॉलिसी का मामला कोर्ट में है। सरकार केवल नई पॉलिसी बनाकर इन्हें पक्का कर सकती है।
- फायर ब्रिगेड के 1344 कर्मचारियों को 3 माह बाद भी न हटाया जाए।
- अनुबंध में होता है नई भर्ती होने पर उन्हें हटाया जाएगा। सरकार नई भर्ती कर रही है, जिसमें कुछ योग्यता में बदलाव किया है। इनमें कर्मचारियों में ज्यादातर उस पर खरा नहीं उतर रहे। इन्हें कुछ छूट दी जा सकती है।
- ईपीएफ व ईएसआई का पैसा कटता है, लेकिन खाते में जमा नहीं होता। 
- सरकार ठेकेदारों से बातचीत कर खाते में पैसा जमा करा सकता है। इसमें कहीं कोई दिक्कत नहीं है।
- रिटायरमेंट पर कर्मचारियों को उसी दिन सभी लाभ मिलें। 
- नियमानुसार 6 महीने पहले कर्मचारी के रिटायरमेंट की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। इस नियम को सख्ती से लागू किया जाए। 
 
सभी आयुक्त और एसपी स्थिति पर रखें नजर: संधू
अनिश्चितकाल धरना-प्रदर्शन में बढ़ते रोष को देखते हुए पुलिस अलर्ट हो गई है। डीजीपी बीएस संधू ने सभी आयुक्त, एसपी आदि को पूरी स्थिति पर नजर रखने के आदेश दिए हैं। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है। डीजीपी ने सभी पुलिस आयुक्तों, एसपी, एसपी रेलवे को पत्र लिखा है, जिसमें कहा कि शहरों में कानून व्यवस्था बनाए रखने को पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाए।
 
मांगें न मानी तो अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे
शहरी स्थानीय निकाय विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल सातवें दिन भी जारी रही। नगर पालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष नरेश कुमार शास्त्री ने बताया कि वे सीएम से बातचीत के लिए जाएंगे, अगर मांगें नहीं मानी गई तो हड़ताल जारी रहेगी। वहीं, कहा कि 17 तक मांगों का समाधान नहीं किया तो हड़ताल को अनिश्चितकालीन किया जाएगा। जनता की परेशानी के लिए प्रदेश की सरकार जिम्मेदार होगी।
 
 
17 के बाद दूसरे महकमों के कर्मी भी करेंगे हड़ताल
सर्व कर्मचारी संघ के बैनर तले मंगलवार को कर्मचारियों ने जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया। सीएम के नाम सभी जिलों में डीसी को ज्ञापन देकर मांगों का समाधान कर हड़ताल समाप्त करने की मांग की गई। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रधान धर्मबीर फोगाट, महासचिव सुभाष लांबा ने चेतावनी दी कि 17 मई तक मांगों का समाधान नहीं किया तो अन्य सभी विभागों के कर्मचारी हड़ताल के समर्थन में सड़कों पर उतर कर कामकाज बंद कर देंगे। 
 
 
3 दिन बाद बीमारी फैलनी शुरू हो जाएगी : डॉ. बिरला
रोहतक. 7 दिन से शहरों में जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर तीन दिन तक नहीं उठाए गए तो बीमारी फैलने का खतरा बढ़ जाएगा। सीएमओ डॉ. अनिल बिरला ने बताया कि 3-4 दिन बाद कूड़े में मक्खी और मच्छर पैदा होने शुरू हो जाएंगे। इसके बाद प्रभावित लोगों में बीमारी फैलनी लगेगी। मक्खी-मच्छर से मलेरिया, उल्टी दस्त, हैजा, पीलिया समेत अन्य बीमारी होने का खतरा रहता है। 
 
हड़ताल तोड़ने को सरकार ने सख्ती नहीं बरती
- 8 मई को जिस दिन कर्मचारी संगठनों ने 9 मई से हड़ताल पर जाने की घोषणा की, तब शहरी एवं नगर निकाय मंत्री कविता जैन का कहना था कि उन्हें हड़ताल के बारे में सूचना नहीं है। उस दिन तत्काल कुछ प्रयास नहीं किए गए।
- 9 मई से 13 मई तक यानि पांच दिन सरकारी प्रतिनिधियों ने हड़ताली संगठनों से कोई बातचीत नहीं की। न ही कूड़ा उठवाने के प्रबंध किए।
- 14 मई को हालात ज्यादा बदत्तर हुए तो नगर निकाय के प्रधान सचिव आनंद मोहन शरण ने कर्मचारियों से पहली बार बातचीत की, जो सिरे नहीं चढ़ सकी।
- 14 मई शाम को फायर ब्रिगेड के हटाए कर्मियों का 3 माह के लिए सेवा विस्तार किया।

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