प्राकृतिक धरोहर का प्रतीक है मुरी टुंगरी माघ टुसू मेला

News - वर्जपुर गांव स्थित मेला में आया विशाल टुसु। मुरी | सुवर्णरेखा और उरांवगाढ़ा नदी के संगम स्थल मुरी है। उसी पहाड़ी को...

Jan 16, 2020, 07:26 AM IST
Muri News - muri tungri magh tusu fair is a symbol of natural heritage
वर्जपुर गांव स्थित मेला में आया विशाल टुसु।

मुरी | सुवर्णरेखा और उरांवगाढ़ा नदी के संगम स्थल मुरी है। उसी पहाड़ी को मुरी टुंगरी कहते है। कुड़माली संस्कृति से जुड़े लेंगहातु कलवाडीह के भगीरथ महतो के अनुसार मुरी टुंगरी प्राकृतिक सुन्दरता का प्रतीक स्थल है बड़ी बड़ी चट्टानें और हरे भरे प्राकृतिक पेड़ पौधे लोगों के मन को मोह लेते है। वर्तमान समय में मेला परिसर पार्क में तब्दील हो चुका है। गुलाब गार्डेन, रंगमंचषाला, लम्बी सीढ़ी एवं सड़क से लोग आसानी से टुंगरी के उपर चढ़ जाते है टुंगरी के उपर डांड़ी (जल कुंड), ग्राम देवता, जगन्नाथ सुभद्रा बलभद्र रथ, शिव मंदिर, बजरंगबली मंदिर, बसंती दुर्गा मंदिर बना हुआ है। यह अभी तीर्थ स्थल के साथ साथ पर्यटक स्थल बन गया है। टुंगरी के पूरब दिशा में ब्रिटिश काल का बारुद खाना है। ब्रिटिश द्वारा इस घर को छोड़ने के बादकई साधु इस घर में रह रहे थे । टुंगरी के पूरब दिशा में चर्च, रेलवे स्टेषन, हिंडाल्को कारखाना और सुवर्णरेखा नदी है जबकि पश्चिम में गोला मुरी पथ है उत्तर दिशा में उरांगगाढ़ा नदी और दक्षिण में मस्जिद है। इस मेला में सभी जाति धर्म के लोग आते है सद्भावना शांति और भाईचारा रुप इस मेला में देखने को मिलता है। मेला के संस्थापक सदस्यों में पूर्व मुखिया स्व बोधन महतो का मेला लगाने में महत्वपूर्ण योगदान था।

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