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डाउनलोड करेंगुना. अपने पिता के जिगरी दोस्त गुरमीत सिंह सिख को 25 साल मुस्लिम परिवार ने अपने साथ रखा, जब उनकी मृत्यु हुई तो दोस्त के बेटे अमजद खान ने ही मुखाग्नि देकर मानवता का धर्म निभाया। उनका अंतिम संस्कार सिख परंपरा के अनुसार किया गया। इस दौरान गुरुद्वारा समिति के सदस्य भी मौजूद थे। उनकी सलाह पर मुस्लिम परिवार ने अंतिम क्रियाएं पूरी की।
रविवार-सोमवार की रात पंजाब निवासी गुरमीत सिंह सिख का भोगी काॅलोनी में ह्रदय गति रुकने से निधन हो गया था। गुरमीत सिंह 25 साल से एक मुस्लिम परिवार के यहां रहते थे क्योंकि उनका अपना कोई नहीं था। पंजाब में कुछ रिश्तेदार थे, लेकिन वह भी उनकी अंतिम क्रिया में शामिल नहीं हुए। सोमवार सुबह अमजद खान ने गुरमीत सिंह को मुखाग्नि दी। इस दौरान गुरुद्वारा समिति के पदाधिकारी भी मौजूद थे। गुरमीत सिंह पिछले एक साल से बीमार थे, हालांकि मुस्लिम परिवार ने कई बार इनका इलाज भी कराया, लेकिन 80 साल से ज्यादा उम्र होने की वजह से डॉक्टरों ने कहा था कि घर पर ही इनकी सेवा की जाए।
मृत्यु होने पर गुरुद्वारा समिति को दी सूचना
मुस्लिम परिवार ने गुरमीत की मृत्यु होने पर गुरुद्वारा समिति को सूचना दी, ताकि उनके धर्म के हिसाब से अंतिम क्रियाएं की जा सकें। अमजद ने बताया कि गुरुद्वारा समिति के पदाधिकारियों ने हमारी बहुत मदद की। वह गाड़ी लेकर आ गए और पूरी रस्म अदा की।
मानवता सर्वोपरि
गुरमीत का यहां ना कोई रिश्तेदार था और ना ही अन्य कोई परिचित। ऐसे में दोस्ती और मानवता का फर्ज निभाते दोस्त के पुत्र ने अंतिम संस्कार किया।
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