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अंगदान को लेकर व्याप्त मिथक और हकीकत, किसी भी उम्र में कर सकते हैं अंगदान

3 वर्ष पहले
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अंगदान आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। कब, किसे, इसकी जरूरत पड़ जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। अंगदान  के लिए अब लोग जागरूक हो रहे हैं। कुछ लोग आगे आकर अंगदान करना भी चाहते हैं, लेकिन अंगदान से जुड़े कई तरह के भय और भ्रांतियां हमारे समाज में व्याप्त हैं। जानते हैं ऐसे ही कुछ मिथकों के बारे में। 


मिथ - अंगदान शरीर को बेड़ौल कर देता है।
हकीकत-
अक्सर लोगों को लगता है कि अंगदान करने से शरीर बिगड़ जाता है। यह सही नही हैं क्योंकि यह नियमित रूप से होने वाली सर्जरी की तरह होता है और अंगों को इसी तरह से हटाया जाता है। अंगों को हटाने की प्रक्रिया गरिमा व सम्मान के साथ पूरी की जाती है और सर्जरी के निशान को अच्छे से कवर किया जाता है।  

 

मिथ-  किसी भी बीमारी में अंगदान नहीं किया जा सकता।
हकीकत-
ऐसा नहीं है, सिर्फ कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं जिनसे ग्रसित होने पर आप अंगदान नहीं कर सकते। आपको सिर्फ कुछ चिकित्सा मानदंडों को पूरा करने की जरूरत होती है। अगर आप उन चिकित्सा शर्तों को पूरा कर देते हैं तो आप अंगदान कर सकते हैं। कभी-कभी कुछ अंग प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त नहीं होते, लेकिन अन्य अंगों का दान किया जा सकता है। 

 

मिथ -  सिर्फ परिवार के सदस्य को ही किडनी दी जा सकती है।
हकीकत -
ऐसा पहले हुआ करता था कि किडनी केवल एक ही परिवार के सदस्य को दी जा सकती है। अब परिवार के दूर के सदस्य, दोस्त या अजनबी को भी किडनी दे सकते हैं। हालांकि, लिविंग डोनर होने के नाते किडनी देने से पहले आपको व्यापक पूछताछ से गुजरना होता है। 

 

मिथ - ज्यादा उम्र के लोग अंगदान नहीं कर सकते।
हकीकत-
प्रचलित धारणा के विपरीत बुजुर्ग भी अच्छे अंगदाता हो सकते हैं। उम्र केवल एक नंबर है। अगर आप चिकित्सा की शर्तें पूरी करते हैं तो आप अंगदान कर सकते हैं। 

 

मिथ - 18 साल से कम उम्र के लोग अंगदान नहीं कर सकते।
हकीकत-
अधिकतर देशों में अंगदान की कानूनी उम्र 18 साल से ऊपर होती है। हालांकि किसी भी उम्र का व्यक्ति अंगदान कर सकता है। अगर अंगदान करने वाला 18 साल से कम उम्र का है तो उसके मां-बाप की सहमति लेना जरूरी होता  है। 

 

मिथ- आप या आपके परिवार के सदस्य अंगदान के लिए शुल्क ले सकते हैं।
हकीकत-
अंगदान एक महान कार्य है। आप या आपके परिवार के सदस्य अंगदान के लिए शुल्क नहीं ले सकते। यहां तक ​​कि अंग हटाने के लिए लागत ज्यादातर मामलों में प्रत्यारोपण प्राप्तकर्ता द्वारा ही वहन की जाती है।

 

मिथ - प्राप्तकर्ता को डोनर के बारे में जानकारी होनी चाहिए
हकीकत-
जिस प्रकार रोगी की गोपनीयता डोनर परिवार और प्राप्तकर्ता दोनों के लिए बनाए रखना बहुत जरूरी होता है। उसी तरह  डोनर के बारे में भी कोई जानकारी डोनर की सहमति से ही प्राप्तकर्ता को बताई जा 
सकती है। 

 

इनका है कहना

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि अंग खराब होने से बचाने व अंगदान को बढ़ावा देने के लिए प्रथम फेज में जयपुर समेत देश के बड़े शहरों में स्टेट आॅर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आॅर्गेनाइजेशन शुरू किया जा रहा है। इसकी तैयारी कर ली गई है। हालांकि, देश के हरेक राज्य में इसे खोला जाना प्रस्तावित है। इस मुहिम में किसी तरह सेे पैसे की कमी नहीं आने दी जाएगी। राज्य सरकारों को आॅर्गन ट्रांसप्लांट सेन्टर के लिए प्रस्ताव भेजना चाहिए।

 

दैनक भास्कर एवं हिंदुस्तान जिंक का संयुक्त प्रयास

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