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भ्रम और तथ्य : क्या आईवीएफ के जरिए पैदा हुए बच्चे नॉर्मल होते हैं?

सामान्य तरीके से हुई प्रेग्नेंसी में भी अबॉर्शन की संभावना 10 फीसदी तक होती है।

Dainik Bhaskar

Aug 24, 2018, 12:52 PM IST
myths and facts related to IVF

हेल्थ डेस्क. नि:संतान दंपतियों के लिए आईवीएफ सबसे वैज्ञानिक और सुरक्षित तकनीक है। लेकिन इसको लेकर दुनियाभर में खासकर भारत में कई तरह के मिथक प्रचलित हैं। इस संबंध में जो सबसे बड़ा सवाल अक्सर पूछा जाता है, वह यही है कि क्या आईवीएफ के जरिए पैदा हुआ बेबी नॉर्मल होता है?
क्यों उठता है ये सवाल?
यह सवाल इसलिए उठता है क्योंकि इसमें अंडों के फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया सामान्य नहीं होती। इसमें अंडों को लैब में फर्टिलाइज किया जाता है। फिर 2 से 5 दिन के भ्रूण को गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है।
तो क्या है फैक्ट?
भले ही भ्रूण को लैब में तैयार किया जाता है, लेकिन भ्रूण का पूरा विकास मां के गर्भ में होता है। भ्रूण का विकास उसी तरह होता है, जैसे एक नॉर्मल प्रेग्नेंसी में होता है। इसलिए आईवीएफ के जरिए गर्भवती हुई महिला को पूरा वही अनुभव होता है, जो एक नॉर्मल प्रेग्नेंसी में होता है। बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास उसी तरह होता है, जैसा प्राकृतिक प्रेग्नेंसी में बच्चे का होता है। बच्चे का जन्म भी बिल्कुल नैचुरल तरीके से होता है। इसलिए यह धारणा पूरी तरह से गलत है कि आईवीएफ बेबी नॉर्मल नहीं होते। ये बेबी पूरी तरह से नॉर्मल होते हैं।

भ्रम और तथ्य
आईवीएफ को लेकर कुछ अन्य मिथक भी हैं। यहां जानते हैं उनका भी सच :
मिथ 1 : आईवीएफ प्रेग्नेंसी में सिजेरियन से ही बच्चे का जन्म होता है।
फैक्ट :
आईवीएफ में भ्रूण को तैयार केवल बाहर किया जाता है। इसका विकास उसी तरह गर्भाशय में होता है, जैसा कि सामान्य प्रेग्नेंसी में होता है। इसलिए इसमें सिजेरियन की उतनी ही संभावना होती है, जितनी कि नॉमल प्रेग्नेंसी में होती है।

मिथ 2 : आईवीएफ से अबॉर्शन की संभावना ज्यादा होती हैं।
फैक्ट :
सामान्य तरीके से हुई प्रेग्नेंसी में भी अबॉर्शन की संभावना 10 फीसदी तक होती है। आईवीएफ में भी अबार्शन की संभावना इतनी ही होती है, ज्यादा नहीं। आईवीएफ केवल फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया है। बाद में इसमें सब वही फॉलो होता है, जो नॉर्मल तरीके से प्रेग्नेंसी में होता है।

मिथ 3 : यह केवल युवा दंपतियों के लिए उपयोगी है।
फैक्ट :
इस तकनीक में अधिक उम्र की महिलाएं यहां तक कि मेनोपॉज के बाद भी महिलाएं प्रेग्नेंट हो सकती हैं। मेनोपॉज वाली महिलाओं को इसके लिए डोनर अंडों की जरूरत पड़ती है।
मिथ 4: आईवीएफ के बाद महिला को 9 महीने कम्पलीट बेड रेस्ट करना होता है।
फैक्ट :
आईवीएफ केवल प्रेग्नेंट होने की प्रक्रिया है। अगर एक बार भ्रूण गर्भाशय में आ गया तो इसके बाद बच्चे का विकास उसी तरह होता है, जैसा सामान्य प्रेग्नेंसी में होता है। यानी डॉक्टर जो काम सामान्य प्रेग्नेंसी में करना अलाऊ करता है, वही काम प्रेग्नेंट महिला अपने डॉक्टर की सलाह से आईवीएफ से हुई प्रेग्नेंसी के दौरान भी कर सकती है।
मिथ 5 : आईवीएफ में सभी अंडे खत्म हो जाते हैं और महिलाओं में मेनोपॉज जल्दी आता है।
फैक्ट :
हर महीने महिला की ओवरीज से 25 से 30 अंडे निकलते हैं। इनमें से फर्टिलाइजेशन के लिए केवल एक ही अंडा बड़ा होता है। बाकी सारे अंडे अपने आप खत्म हो जाते हैं। यह बड़ा अंडा भी अगर फर्टिलाइज नहीं होता है तो खत्म हो जाता है। आईवीएफ में ये सभी अंडे निकाल लिए जाते हैं। चूंकि ये वैसे भी खत्म होने हैं। इसलिए ऐसा बिल्कुल नहीं है कि अगर आईवीएफ के लिए अंडे निकाल लिए गए तो अगले महीने नहीं बनेंगे। ये अंडे अगले महीने फिर से बनेंगे। मेनोपॉज वाली धारणा भी गलत है।


( अधिक जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1800 102 9413 पर कॉल करें या

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