प्रकृति ने किडनी देकर मां को दी दूसरी जिंदगी
महिला दिवस के मौके पर निजी अस्पताल की ओर से करीब एक दर्जन किडनी डोनर को सम्मानित किया गया। अपनी किडनी देकर दूसरों की जिंदगियां बचाने वाली महिलाओं में युवा, प|ियां और बेटियां शामिल थीं।
उन्होंने साहस, स्नेह व बलिदान की अनूठी मिसाल देते हुए ये साबित कर दिया कि महिलाओं का स्थान समाज में कितना ऊंचा व आदर योग्य है। युवा उम्र में जब सभी अपने कैरियर और बेहतर जिंदगी की तरफ कदम बढ़ा रहे होते हैं तो अकसर वे सिर्फ अपने बारे में सोचते हैं, लेकिन मोहाली निवासी प्रकृति ठीक इसके विपरीत सोच रखती हैं। प्रकृति ने उस समय दूसरी बार भी नहीं सोचा जब डॉक्टर्स ने उनकी मां अनीता छाबड़ा की किडनी ट्रांसप्लांट की बात कही। प्रकृति ने तुरंत अपनी मां को किडनी देने की पेशकश की। वह स्वेच्छा से आगे आईं और अपनी प्यारी मां के लिए किडनी देने की इच्छा जताई। मां किडनी की समस्या के कारण दर्द से गुजर रही थीं। अनीता की पिछले साल फरवरी महीने मोहाली के निजी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट की गई।
प्रकृति ने कहा कि मेरे लिए मेरी मां ही सब कुछ है और मेरी पूरी दुनिया है। मैं उन्हें किसी भी दर्द में देखने की कल्पना तक नहीं कर सकती थी। मेरे द्वारा अपनी किडनी देना मेरे जन्म से लेकर अब तक उनके स्नेह के एक छोटे से हिस्से की अदा करने के समान है। उन्होंने कहा कि अब जब मैं मां को स्वस्थ और फिट देखती हूं तो मुझे अहसास मिलता है कि ये करीबी रिश्ते कितने महत्वपूर्ण हैं। परिवार एक पेड़ की शाखाओं की तरह है, जब पेड़ की एक शाखा सूखने लगती है तो पूरे पेड़ की संरचना बदलने लगती है। मोहाली के एक अन्य डोनर जिन्नी कपूर ने अपने पति संदीप कपूर के जीवन को बचाने के लिए आगे आईं। 7 महीने पहले किडनी ट्रांसप्लांट की गई। रोपड़ से गगनदीप कौर (21) ने अपने बीमार पिता को बचाया, जिन्हें तत्काल किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता थी।
अनीता छाबड़ा
प्रकृति
उनके स्नेह के एक छोटे से हिस्से की अदा करने के समान है। उन्होंने कहा कि अब जब मैं मां को स्वस्थ और फिट देखती हूं तो मुझे अहसास मिलता है कि ये करीबी रिश्ते कितने महत्वपूर्ण हैं। परिवार एक पेड़ की शाखाओं की तरह है, जब पेड़ की एक शाखा सूखने लगती है तो पूरे पेड़ की संरचना बदलने लगती है। मोहाली के एक अन्य डोनर जिन्नी कपूर ने अपने पति संदीप कपूर के जीवन को बचाने के लिए आगे आईं। 7 महीने पहले किडनी ट्रांसप्लांट की गई। रोपड़ से गगनदीप कौर (21) ने अपने बीमार पिता को बचाया, जिन्हें तत्काल किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता थी।