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सिद्धू की बेटी राबिया ने कहा- मम्मी-पापा कहेंगे तो पंजाब की भलाई के लिए राजनीति में आऊंगी

3 वर्ष पहले
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अमृतसर.  निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू को सुप्रीम कोर्ट से कत्ल केस से बरी किए जाने के बाद पहली बार मीडिया के सामने आई उनकी बेटी राबिया सिद्धू ने पंजाब की भलाई के लिए राजनीति में आने की बात कही। हालांकि उन्होंने यह कदम माता-पिता की इजाजत के बाद ही उठाने का दावा किया। राबिया अपने पिता सिद्धू के हक में फैसला आने के बाद पहली बार मीडिया के सामने आई हैं। 

 

 

अगर मम्मी-पापा चाहेंगे तो राजनीति में आना चाहूंगी- राबिया

- राबिया ने अदालत के फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि पापा ने कभी कोई गलत काम नहीं किया। फैसला आने से पहले कुछ घबराहट जरूर थी। पर पापा कहते हैं कि डरता वह है जिसने कुछ गलत किया हो।

- सिद्धू के जेल जाने की आशा रखने वालों के खिलाफ कुछ भी बोलने से मना करते हुए उन्होंने कहा कि वह विरोधियों का भी बुरा नहीं चाहेंगी। पापा ने आज तक किसी के हक का एक रुपया भी नहीं खाया। इसी दौरान उन्होंने कहा कि अगर मम्मी-पापा चाहेंगे तो वह भी पंजाब की भलाई के लिए राजनीति में आना चाहेंगी।

 

सुखबीर बादल ने केस को उछाला : डॉ. नवजोत सिद्धू 

 

- नवजोत सिंह सिद्धू के बरी होने पर खुशी जाहिर करते हुए उनकी पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने कहा कि यह खुशी हमारे परिवार की ही नहीं यह हर उस व्यक्ति की खुशी है जो ईमानदारी से काम करता है। सिद्धू लोअर कोर्ट में ही बरी हो चुके थे।

- मृतक व्यक्ति के परिवार के न चाहने पर भी सुखबीर सिंह बादल ने केस को उछाला। पहले इस मामले में न बोलने का कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि केस अदालत में होने कारण वह चुप रही हैं।

-  सुखबीर ने अपनी सारी ताकत सिद्धू को फंसाने की कोशिश में ही लगा दी। अगर वह सिद्धू से मिलकर पंजाब की भलाई के लिए काम करते तो आज जो हालत बादलों की हुई वह न होती। उन्होंने कहा कि हमेशा ईमानदार व अच्छे लोगों को साथ लेकर चलना चाहिए उन्हें खत्म करने में जाेर नहीं लगाना चाहिए।

 

रोड रेज मामला : सुप्रीम कोर्ट में तीनों पक्षों की ये दलीलें

बचाव पक्ष : गुरनाम हार्ट के मरीज थे, पुलिस ने फंसाया
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सिद्धू की ओर से वकील आरएस चीमा ने दलील दी थी कि वह निर्दोष हैं और पुलिस ने उन्हें फंसाया। वह ये नहीं जानते थे कि गुरनाम सिंह को दिल की बीमारी है। इस मामले में कई अहम गवाहों के बयान पुलिस ने दर्ज नहीं किए। निचली अदालत का आरोपमुक्त करने का फैसला सही था। गुरनाम का दिल पहले से कमजोर था और ये बात पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आई है।

 

 

शिकायतकर्ता : सिद्धू जानते थे वह क्या कर रहे हैं
शिकायतकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार और सिद्धार्थ लूथरा ने कहा था कि सिद्धू के ख़िलाफ़ हत्या का मामला बनता है। सिद्धू को ये पता था कि वो क्या कर रहे हैं। उन्होंने जो किया वो सबकुछ जानते हुए किया, इसलिए उनपर हत्या का मुकदमा चलना चाहिए। अगर ये रोड रेज का मामला होता तो टक्कर मारने के बाद चले जाते लेकिन सिद्धू ने पहले गुरनाम सिंह को कार से निकाला और जोर का मुक्का मारा।

 

पंजाब सरकार :  हाईकोर्ट की सजा बरकरार रखने को कहा था
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पंजाब सरकार ने कहा था कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा जाए, जिसमें नवजोत सिंह सिद्धू व उनके साथी को गैर इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए को 3 साल की सजा सुनाई थी।

 

यह था मामला

- 27 दिसंबर 1988 को सिद्धू और उनके दोस्त रूपिंदर सिंह संधू की पटियाला में कार पार्किंग को लेकर गुरनाम सिंह से कहासुनी हुई थी। झगड़े के बाद गुरनाम की मौत हो गई थी। सिद्धू और उनके दोस्त संधू पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया था।

- 1999 में सेशन कोर्ट से सिद्धू को राहत मिली और केस खारिज कर दिया गया। 1 दिसंबर 2006 को हाईकोर्ट बेंच ने सिद्धू और उनके दोस्त को दोषी माना। 6 दिसम्बर को सुनाए गए फैसले में सिद्धू और संधू को 3-3 साल की सज़ा सुनाई गई और एक लाख जुर्माना भी लगा था। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

 

 

ट्रायल कोर्ट में यह कहा था

ट्रायल कोर्ट में नवजोत सिद्धू को बरी करवाने वाले एडवोकेट एचपीएस वर्मा ने बताया, उस समय मेडिकल एविडेंस और ओरल एविडेंस में विरोधाभास था। हमने डॉक्टरों की उस रिपोर्ट को आधार बनाया था, जिसमें पुष्टि हुई थी कि गुरनाम सिंह का हार्ट कमजोर था और उसकी मौत हार्ट अटैक से हुई थी। हमारी दलील पर कोर्ट ने बरी कर दिया था।

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