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नवाज़ शरीफ़: हार न मानने वाले राजनेता

8 वर्ष पहले
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नवाज़ शरीफ़ 1981 में पंजाब प्रांत के वित्तमंत्री बनाए गए थे

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के एक रईस परिवार में 25 दिसंबर 1949 को पैदा हुए मियां मोहम्मद नवाज़ शरीफ़ बार देश के दो बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं.

लाहौर के गवर्नमेंट कॉलेज से स्नातक और पंजाब विश्वविद्यालय से क़ानून की डिग्री हासिल करने वाले नवाज़ शरीफ़ का जीवन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है.

दो बेटों और एक बेटी के पिता नवाज़ शरीफ़ की पंजाब में लोकप्रियता का आलम यह है कि लोग उन्हें \'लायन ऑफ़ पंजाब\' के नाम से बुलाते हैं. उनके भाई शहबाज़ शरीफ़ भी राजनीति में सक्रिय है. वे अभी पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री है. उनकी बेटी मरियम नवाज़ इस बार चुनाव तो नहीं लड़ी हैं लेकिन उन्होंने पीएमएल (नून) का चुनाव प्रचार ज़रूर किया है.

प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने 1976 में शरीफ़ परिवार के स्टील के कारोबार का राष्ट्रीयकरण कर दिया. इस घटना ने उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया और उन्होंने पाकिस्तान मुस्लिम लीग की सदस्यता ली.

राजनीतिक सफ़र

वे पाकिस्तान का शहरी चेहरा बनकर उभरे.पंजाब के गवर्नर गुलाम जिलानी ख़ान ने 1981 में उन्हें पंजाब प्रांत का वित्तमंत्री और 1985 में पंजाब प्रांत का मुख्यमंत्री नियुक्त किया. लेकिन राष्ट्रपति जनरल जिया उल हक़ ने शरीफ़ की सरकार को 31 मई 1988 को बर्खास्त कर दिया.

राष्ट्रपति जनरल जिया उल हक़ की एक विमान हादसे में हुई मौत के बाद शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (पीएमएल) फ़िदा ग्रुप और जुनेजो ग्रुप में बंट गई. जुनेजों ग्रुप का नेतृत्व मोहम्मद खान जुनेजो के हाथ में था.

इन दोनों ग्रुपों ने 1989 के आम चुनावों में बेनज़ीर भुट्टो की पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) का मुक़ाबला करने के लिए सात धार्मिक और रूढ़ीवादी पार्टियों के साथ गठबंधन कर इस्लामी जम्हूरी इत्तेहाद (आईजेआई) के नाम से एक मोर्चा बनाया.

इसका नेतृत्व गुलाम मुस्तफ़ा जटोई और नवाज़ शरीफ़ के हाथ में था. इस गंठबंधन ने बहुमत हासिल किया. नवाज शरीफ़ ने नेशनल असेंबली में बैठने की जगह पंजाब प्रांत का मुख्यमंत्री बनना बेहतर समझा.

नवाज शरीफ़ ने नवंबर 1990 में देश के 12वें प्रधानमंत्री बने. लेकिन सेना के बढ़ते दबाव की वजह से उन्होंने अप्रैल 1993 में प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. इस सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 1993 में बहाल कर दिया था.

सैनिक तख्तापटल

नवाज़ शरीफ़ ने सऊदी अरब में निर्वासित जीवन बिताया था

इसके बाद 1997 में हुए आम चुनाव में उनकी पार्टी ने एक बार फिर शानदार जीत दर्ज की और नवाज़ शरीफ़ फिर प्रधानमंत्री बने.

अपने प्रधानमंत्री काल में नवाज़ शरीफ़ ने कई संवैधानिक सुधार किए. इस वजह से उनका न्यायपालिका और सेना के साथ टकराव होता रहा.

तत्कालीन सेना अध्यक्ष जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने 12 अक्तूबर 1999 को उनकी सरकार का तख्तापलट कर दिया.

उनपर श्रीलंका से आ रहे मुशर्रफ के विमान का अपहरण करने और आतंकवाद फैलाने का आरोप लगाया गया. इन्हीं आरोपों में उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया.

सरकार के साथ हुए एक कथित समझौते के बाद उन्हें परिवार के 40 सदस्यों के साथ सऊदी अरब निर्वासित कर दिया गया. वे 2007 में एक बार फिर स्वदेश लौटे.

पाकिस्तान में 2008 में चुनाव में उनकी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवजा (पीएमएल-एन) ने अच्छा प्रदर्शन किया. लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या की वजह से पैदा हुई सहानुभूति की वजह से पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) को अधिक सीटें मिली और उसने सरकार बनाई.