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बीबीसी संवाददाता, पाकिस्तान
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और इस बार भी प्रधानमंत्री की दौड़ में शामिल नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि अगर उनकी सरकार बनी तो वे आतंकवाद के ख़िलाफ़ कथित युद्ध से पाकिस्तान को अलग कर लेंगे.
बीबीसी के साथ विशेष बातचीत में उन्होंने ये बातें कहीं. अमरीका पर 11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद से ही पाकिस्तान अमरीका के नेतृत्व वाले इस युद्ध का हिस्सा रहा है.
पश्चिमी देशों के लिए ये सवाल अहम है कि पाकिस्तान का अगला प्रधानमंत्री अपनी ज़मीन पर इस्लामी चरमपंथियों से कैसे निपटेगा.
इस सप्ताह चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री पद की दौड़ में आगे माने जा रहे नवाज़ शरीफ़ ने इस सवाल का जवाब दे दिया. नवाज़ शरीफ़ पर ये आरोप लगते रहे हैं कि उनका रुख़ कट्टरपंथियों के प्रति नरम रहा है.
चिंताये पूछे जाने पर कि क्या वे आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध से पाकिस्तान को अलग कर लगें, नवाज़ शरीफ़ ने कहा, \"हाँ, हमें ये करना पड़ेगा. अगर पाकिस्तान में और दुनिया में शांति रहनी है तो ऐसा करना पड़ेगा.\"
क्या वे तालिबान और अल क़ायदा के ख़िलाफ़ सैनिक कार्रवाई रोकेंगे, इस सवाल पर उनका कहना था कि वे कुछ नहीं कह सकते, ये विस्तार से समझने का विषय है.
पश्चिमी देशों के नेता पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से लगे क़बायली इलाक़ों में चरमपंथी गुटों के ख़िलाफ़ कार्रवाई को लेकर चिंतित रहते हैं.
नवाज़ शरीफ़ के इस बयान से पश्चिमी देशों में इस बात को लेकर चिंता बढ़ सकती है कि चरमपंथियों को पाकिस्तान से काम करने में ज़्यादा स्वतंत्रता होगी. ख़ासकर वैसी स्थिति में जब वर्ष 2014 के अंत तक अफ़ग़ानिस्तान से विदेशी सैनिकों की वापसी होनी है.
दो बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रह चुके नवाज़ शरीफ़ ने बीबीसी को बताया कि वे इलाक़े में शांति के लिए अन्य देशों के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं.
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