पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंपाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ का कहना है कि हाल के महीनों में जानलेवा हमलों की कई वारदातों के बावजूद वह तालिबान के साथ शांति-वार्ता करना चाहते हैं. चरमपंथियों के साथ बातचीत के लिए नवाज़ शरीफ़ ने चार सदस्यों वाला वार्ताकारों का एक दल भी बनाया है.
नेशनल एसेम्बली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 'चरमपंथ' को परास्त किया जाना चाहिए, तरीका चाहे बातचीत का हो या बल प्रयोग का.
उन्होंने यह भी कहा है कि वह शांति वार्ता के लिए एक आख़िरी मौका देना चाहते हैं. वरिष्ठ पत्रकार रहीमुल्ला युसुफ़ज़ई और इरफ़ान सिद्दीक़ी, पूर्व राजदूत रुस्तम शाह मोहम्मद और खुफ़िया सेवा आईएसआई के एक सेवानिवृत्त मेजर आमिर शाह शांति वार्ता के लिए प्रयासों को आगे बढ़ाएंगे और इस बारे में गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करेंगे.
पत्रकार रहीमुल्ला युसुफ़ज़ई का कहना है, ''नवाज़ शरीफ़ सरकार ने जनता से वादा किया था वह इस मसले को बातचीत से हल करने की कोशिश करेंगे. सरकार ने पहले भी कुछ उलेमा, सेना और सियासी लोगों के ज़रिए बात करने की कोशिश की थी लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाई थी. अब ये एक नई कोशिश है और शायद आख़िरी कोशिश हो.''
तालिबान के नेता हकीमुल्ला मेहसूद बीते साल एक ड्रोन हमले में मारे गए थे. इसके बाद तालिबान के हमले भी तेज़ हो गए हैं. मेहसूद के वारिस मुल्ला फ़ज़लुल्ला ने शांति वार्ता को ख़ारिज़ कर दिया है और बदला लेने का वादा किया है.
नवाज़ शरीफ़ के इरादे
संवाददाताओं का कहना है कि पाकिस्तान के कई लोगों को लगता है कि देश का राजनीतिक नेतृत्व चरमपंथी ख़तरों के सामने बौना लगता है.
नवाज़ शरीफ़ बीते साल मई में ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने थे और उन पर हिंसा पर क़ाबू पाने के लिए बड़ा दबाव बना हुआ है. टेलीविज़न पर अपने संबोधन में उन्होंने सांसदों से कहा, ''मुझे पूरा भरोसा है कि जब हम चरमपंथियों के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई शुरू करेंगे तो पूरा देश सरकार के साथ होगा, लेकिन मैं शांति वार्ता के लिए एक आख़िरी मौका देना चाहता हूं.''
नवाज़ शरीफ़ ने यह भी कहा कि वह ख़ुद इन हमलों से तंग आ चुके हैं और शांति स्थापित करने के लिए हर संभव क़दम उठाएंगे. वार्ता के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की गई है. प्रधानमंत्री ने वार्ता के लिए कोई कड़ी शर्त भी नहीं रखी है.
वहीं तालिबान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई पर ज़ोर देने वाले पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने नवाज़ शरीफ़ पर चरमपंथियों के साथ नरमी बरतने का आरोप लगाया है.
कुछ जानकारों का कहना है कि सैन्य कार्रवाई नहीं करने का मतलब यह होगा कि तालिबान को मज़बूत होने का मौका मिलेगा. हालांकि पाकिस्तान के उत्तरी वज़ीरिस्तान कबाइली इलाके में सीमित सैन्य कार्रवाई की जा रही है.
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.