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लापरवाह निर्माण कार्य और इनसे हुए हादसों में जान गंवाते आम नागरिक

प्रधानमंत्री के चुनाव क्षेत्र में यह हादसा होना बताता है कि नौकरशाही के स्तर पर कितनी लापरवाही बरती गई।

Dainik Bhaskar

May 17, 2018, 09:21 AM IST
negligence in construction works and people causalities
वाराणसी में फ्लाईओवर का बीम गिरने से उन्नीस लोगों के मारे जाने ने उत्तर प्रदेश सेतु निगम के काम के स्तर पर प्रश्न चिह्न लगा दिया है। यह वही निगम है जिसकी कभी इस बात के लिए तारीफ हुई थी कि इसने अन्य राज्यों में ही नहीं, पड़ोसी नेपाल, इराक व यमन में भी प्रोजेक्ट हासिल किए थे। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के कई पुलों और प्लाई ओवरों में बनाए जाने के कुछ वक्त बाद ही दरारें व खामियां दिखाई देती रही हैं। गनीमत रही है कि अब तक कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ था पर वह दुखद त्रासदी भी सामने है। जांच के आदेश देकर जल्द रिपोर्ट मांगी गई है। यह मामला उत्तर प्रदेश का ही नहीं है, देश में इस तरह के हादसे कहीं भी हो सकते हैं बल्कि होते रहते हैं पर बड़ी त्रासदी न होने से सुर्खियां नहीं बनती। कोलकाता में 2016 में फुटओवर ब्रिज ध्वस्त हुआ ही था, जिसमें करीब पचास लोग मारे गए थे। जांच रिपोर्ट आने के पहले ही कहा जा सकता है कि इस तरह के निर्माण को पेशेवर ढंग से न लेने और राजनीतिक व नौकरशाही दखल के कारण सरकारी निगमों के सुचारू ढंग से काम करने में बाधाएं आती हैं। पेशेवर रुख न अपनाने का इससे बड़ा सबूत क्या होगा कि पुल पर बीम दोपहर के उस वक्त चढ़ाया जा रहा था जब ट्रैफिक सर्वाधिक होता है। ऐसा जोखिम वाला काम आमतौर पर रात के वक्त किया जाता है। कहा जा रहा है कि निगम पर पुल अक्टूबर तक पूरा करने का दबाव था। निर्माण कार्यों की जब प्लानिंग बनती है तो उसका एक तय कार्यक्रम होता है, जिसमें अन्य तकनीकी बातों के अलावा सार्वजनिक सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाता है लेकिन, किसी तरह का हस्तक्षेप हो तो फिर तय कार्यक्रम के साथ समझौता ऐसे हादसों को जन्म देता है। प्रधानमंत्री के चुनाव क्षेत्र में यह हादसा होना बताता है कि नौकरशाही के स्तर पर कितनी लापरवाही बरती गई। फिर भ्रष्टाचार की आशंका तो हर जगह रहती है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता से लेकर हर तरह के मानकों से समझौता होने की गुंजाइश बनी रहती है। उत्तर प्रदेश के मुुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जांच का निर्णय देने के साथ तत्काल रिपोर्ट मांगी है। अब देखना यह है कि रिपोर्ट अाने के बाद सिर्फ दोषियों पर कार्रवाई तक ही मामला जाता है अथवा सुव्यवस्था की दिशा में कोई कदम उठाया जाता है ताकि ऐसे हादसे दोहराए न जाएं।

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