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डाउनलोड करेंजगदलपुर/बीजापुर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजापुर के जांगला में शनिवार को एक सभा को संबोधित किया। उन्होंने अपने भाषण में यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि वे बीजापुर ही क्यों आए हैं। उन्होंने कहा मैं आज इसलिए आया हूं, ताकि आपको बता सकूं, कि जिनके नाम के साथ पिछड़ा जिला होने का लेबल लगा दिया गया है, उनमें अब नए सिरे से, नई सोच के साथ बड़े पैमाने पर काम होने जा रहा है। बचपन में मेरे स्कूल में टीचर कमजोर बच्चों पर विशेष ध्यान देते थे, ऐसे ही इन पिछड़े जिलों पर भी अलग से ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा बीजापुर से पिछ़ड़े जिले का ठप्पा हटाने आया हूं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि चुनाव करीब हैं इसलिए आदिवासियों को साधने की पूरजोर कोशिश का ये भाजपा का पहला चरण है। आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत बीजापुर से करना और आने वाले िदनों में हवाई सेवा शुरू करने का वादा कर प्रधानमंत्री का यह कहना कि आने वाले िदनों में विकास का सूरज पूर्व दिशा से नहीं दक्षिण (बस्तर) से निकलेगा, इसी बात के संकेत हैं।
हल्बी से भाषण, बस्तरिया का दिल जीतने की कोशिश
उन्होंने सभा में संबोधन की शुरूआत दोपहर 1 बजकर 40 मिनट के करीब की। सभा शुरू करते हुए उन्होंने कहा कि मैं बाबा साहेब अंबेडकर कहूंगा आप लोग दो बार अमर रहें अमर रहें कहेंगे। बाबा साहेब के अमर रहें के नारे के बाद उन्होंने हल्बी में बोलना शुरू किया। उन्होंने कहा बस्तर अउर बीजापुर चो आराध्य देवी मां दंतेश्वरी, भैरमगढ़ चो बाबा भैरमदेव , बीजापुर चो चिकटराज और कोदाई माता, भाेपालपट्टनम चो भद्रकाली के खूबे खूब जोहार। सियान सजन दादा दीदी मनके जोहार। लेका लेकी पढ़तो लिखताे नोनी बाबू मनके खूबे खूबे मया। इसका मतलब यह कि बस्तर के आराध्य देवी और देवताओं को प्रणाम और बुजुर्ग, दीदी, लड़के-लड़कियों और छात्र-छात्राओं को प्यार। मोदी के इस भाषण के बाद सभा स्थल में मोदी-मोदी गूंजने लगा। इसके बाद उन्होंने आगे के भाषण की शुरुआत की। मोदी के इस भाषण के कई मायने निकाले जा रहे हैं। राजनैतिक विश्लेषक इसे दलितों और आदिवासियों को साधने वाला भाषण बता रहे हैं।
मोदी ने इन योजनाओं की शुरुआत की
- बैंक शाखाओं और एटीएम की शुरुआत खुद मोदी ने की।
- विभिन्न योजनाओं के तहत हितग्राहियों को मिलेगी सामग्री और सहायता।
- प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के तहत चेक वितरण मंच पर।
- प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस चूल्हा और सिलेंडर वितरण मंच पर।
- वरिष्ठ नागरिकों को सहायता उपकरण वितरण मंच पर किया।
- इमली प्रसंस्करण के लिए स्व-सहायता समूह को मशीन वितरण।
- तेंदूपत्ता संग्राहकों को चरणपादुका वितरण।
- हितग्राहियों को ई-रिक्शा वितरण।
- किसानों को सौर सुजला पंप का वितरण।
इन्हें मिला पहला टिकट
भानुप्रतापपुर स्टेशन की टिकट खिड़की में सुबह 10 बजे से कतार लग गई थी। पहली टिकट भानुप्रतापपुर की महिला बलविंदर कौर ने 11.25 बजे ली जो अपने परिवार के साथ दुर्ग जा रही थी। कौर ने कहा दुर्ग कोई काम नहीं है लेकिन पहली ट्रेन में सफर करने की खुशी में यात्रा कर रही हैं। ट्रेन शुरू होने के पहले दिन स्टेशन में चना फल्ली बेचने भानुप्रतापपुर का गेंदलाल सोनी पहुंचा। उसने कहा वह अब तक बसस्टेंड में ही चना-फल्ली बेचा करता था। अब ट्रेन के टाइम स्टेशन आकर बेचेगा।
सेलून के लिए 2 घंटे रोकनी पड़ी ट्रेन
ट्रेन भानुप्रतापपुर से राइट टाइम चलते हुए दोपहर 3.36 बजे रिसामा पहुंची। वहां ट्रेन को दो घंटे रोककर जोन के जीएम के सेलून का इंतजार किया गया। उसके गुजरने केबाद शाम 5.36 बजे रिसामा से ट्रेन को दुर्ग के लिए रवाना किया गया। इससे यात्री परेशान होते रहे। भानुप्रतापपुर से गुदुम के बीच पहली बार चलनेवाली ट्रेन की गार्ड नेहा कुमारी को भानुप्रतापपुर की एक बुजुर्ग महिला ने देखते ही गले लगा लिया।
विश्लेषण : शिव दूबे
बस्तर से निकला पूरे देश के लिए संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के छत्तीसगढ़ में पांच घंटे देश को नया संदेश दे गए। आदिवासी महिला को चप्पल पहनाने का काम मोदी ने अनायास किया या फिर प्रीप्लांड था, इस पर दो राय हो सकती है। पर यह तस्वीर दलित आंदोलन के बाद पिछले दिनों बने माहौल को धुंधला करने का प्रयास जरूर है। एक संदेश जो सीधा गया वह ये कि भाजपा जय भीम के नारे के करीब आ रही है। आंबेडकर जयंती पर सरकार का यह राजनीतिक दांव भी कहा जा सकता है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के छोर पर बीजापुर जैसे दूरस्थ इलाके के जांगला गांव से देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना की शुरुआत कर दूसरा संदेश भी दिया गया है। इसमें भी दो भाव हैं। पहला तो राष्ट्रीय है जिसमें अति पिछड़े वर्ग को सरकार की प्राथमिकता में ऊपर रखने की बात है। ताकि नक्सलवाद जैसी समस्या पर सरकार के प्रयास भारी पड़ते नजर आएं। दूसरा है, छत्तीसगढ़ के आदिवासी वोट बैंक पर भाजपा की पकड़ मजबूत बनाना। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह अरसे से इस प्रयास में थे कि प्रधानमंत्री की प्राथमिकताओं में बस्तर भी हो। इससे पहले दंतेवाड़ा के लाइवलीहुड कॉलेज ले जाकर रमन ने मोदी काे बस्तर की बदलती तस्वीर दिखाई थी। इन प्रयासों से ही जांगला का चयन किया गया। बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में रमन को आज पीएम का बड़ा साथ मिला। राजनीतिक नफा-नुकसान अपनी जगह हो सकता है। छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी समस्या से निपटने के लिए इसी तरह के प्रयासों की ही दरकार है।
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