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नवजात को पॉलीथिन में लपेट झाड़ियों में फेंका, मासूम सांस तक नहीं ले पा रहा था

3 वर्ष पहले
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इंदौर। राजेंद्र नगर इलाके में शनिवार को झकझोर देने वाली घटना सामने आई। कैट के पास ग्राम सुखनिवास की ओर जाने वाले मार्ग पर शनिवार सुबह एक दिन के नवजात को पन्नी में लपेटकर कोई कंटीली झाड़ियों में फेंक गया। 
फरिश्ता बन आए एक राहगीर ने नवजात बच्चे का रोना सुनकर 108 एंबुलेंस को सूचना दी। नवजात का एमवायएच में उपचार चल रहा है। हालत खतरे से बाहर है। 

 


ऑक्सीजन देकर बचाया 
- पुलिस के अनुसार घटना शनिवार सुबह 8.30 बजे की है। पन्नी में लिपटे होने से नवजात ठीक से सांस भी नहीं ले पा रहा था।

- एंबुलेंस के पायलट संजय मंडलोई और ईएमटी मनीष जैन ने ऑक्सीजन देकर नवजात की सफाई की। 


वक्त ने ऐसे दिया साथ 
- डॉक्टरों के मुताबिक डिलीवरी के तुरंत बाद ही नवजात को फेंक दिया गया था। ट

- कुछ देर और हो जाती तो बच्चे की जान भी जा सकती थी। 


ऐसी घटनाएं... 
अस्पताल के बाद आश्रम 
- स्वस्थ होने तक इन बच्चों को अस्पताल में रखा जाता है। उसके बाद बाल आश्रम भेज दिया जाता है।

- इंदौर में ऐसे तीन आश्रम हैं- 1. राजकीय बाल संरक्षण आश्रम। 2. मातृछाया आश्रम और 3. नवदीप सेवा संस्थान। 


हर बार अज्ञात पर ही केस 
- पुलिस के मुताबिक आज तक ऐसे जितने भी मामले सामने आए, सभी में अज्ञात पर ही कायमी हुई है, अगर ऐसा है तो फिर दोषी आखिर कौन है? 


24 घंटे ही हुए थे दुनिया में आए 
- आश्रमों में इन बच्चों को गोद लेने के लिए डेढ़ से दो साल की वेटिंग रहती है। 2015 में ऐसे चार-चार साल के दो बच्चों को इंदौर के परिवारों ने गोद लिया था।

- गोद लेने वाले अब ऑनलाइन आवेदन भी करते हैं। 


2 साल में 38 लावारिस 
दो साल में 38 लावारिस नवजात पहुंचे हैं एमवायएच। इनमें से 5 नवजात की हो गई है मौत। (अस्पताल से प्राप्त जानकारी के मुताबिक) 

 
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