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पंजाब राजभवन से हुई आचार्य श्री महाप्रज्ञ जन्म शताब्दी वर्ष की शुरुआत

एक वर्ष पहले
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चंडीगढ़ | मनीषी संत मुनि विनय कुमार आलोक व अभयमुनि ने शनिवार को पंजाब राजभवन में महामहिम व चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर से मुलाकात की। बदनाेर ने कहा कि मुनि की कृपा दृष्टि सदा मेरे ऊपर बनी रही है। मैं अपने आपको खुशकिस्मत मानता हूं कि आचार्य श्री महाप्रज्ञ जन्म शताब्दी वर्ष की शुरुआत पंजाब राजभवन से हुई और निरंतर कार्यक्रमों का दौर जारी है और जन्म शताब्दी वर्ष का समापन भी आप राजभवन से ही करें। कई बार अपने आसपास के लोगों से सुना होगा। यह भी हो सकता है अापने भी कभी इस का प्रयोग किया होगा। पर क्या सही में यह वाक्य बोलते वक्त इस बात पर सीरियस होते है? तो इसका जवाब तो वैसे आप ही के भीतर छुपा हुआ है पर फिर भी यह बताना जरूरी है कि नहीं, आप सही में इस बात पर गंभीर नहीं है। पर क्यों? क्योंकि अगर आप गंभीर होते तो यह पूछने की कभी भी जरूरत नहीं पड़ती। ये प्रवचन मुनि विनय कुमार अालाेक ने अणुव्रत भवन सेक्टर-24 में दिए। भरोसा तो एक स्वभाव है। स्वभाव कभी भी बताया नहीं जाता वह तो महसूस किया जाता है, वह एक्सपीरियंस किया जाता है अनुभव किया जाता है और यह अंदर से आता है ना कि लाया जाता है। तो भरोसा ऐसी चीज होती है जो अंदर से प्रकट होता है ना कि भरोसा दिलाया जाता है। भरोसा अगर होता है तो पूरा होता है या नहीं तो थोड़ा भरोसा है। क्याेंकि मैंने अक्सर देखा है कई लोगो को बोलते कि मुझे आप पर थोड़ा तो भरोसा है ही।
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