डलहौजी का नाम देशभक्त अजीत सिंह के नाम पर रखा जाए: एनजीओ
कैनेडा स्थित प्रोफेसर मोहन सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के प्रधान साहिब सिंह थिंद ने बुधवार को भारत सरकार से अंग्रेज हुकूमत के जालिम प्रशासक लॉर्ड डलहौजी शहर का नाम बदलकर शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह के चाचा व महान देशभक्त सरदार अजीत सिंह के नाम पर रखने की मांग की। सरदार अजीत सिंह ने अपनी जिंदगी के अंतिम साल डलहौजी मे व्यतीत किए थे व वह 15 अगस्त 1947 को भारत की आजादी वाले दिन इस संसार को अलविदा कह गए थे। प्रेस क्लब में थिंद ने कहा कि डलहौजी का नाम अंग्रेज हुकूमत के जालिम प्रशासक के नाम पर रखा गया है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि जो शासक भारतीयों पर अपने जुल्म करने के लिए मशहूर था आजादी के 70 साल बाद भी उसको रोज याद किया आ रहा है। केंद्र सरकार से मांग करते हुए उन्होंने कहा कि झूठी ब्रिटिश शाम को तोड़ते हुए ऐसे शहरों के नामों को बदल कर देशभक्तों के नामों पर रखा जाए। प्रोफेसर मोहन सिंह यादगारी फाउंडेशन के बारे मे बोलते हुए थिंद ने कहा कि यह गैर सरकारी संस्था 30 साल से विश्व की अलग-अलग सरकारों के साथ कार्य कर रही है व ब्रिटिश हुकूमत के समय की गई गलतियों के बारे में माफी मांगने व शेरों के नाम बदलने के मुद्दे उठा रही है। मोदी सरकार द्वारा अंडेमान व निकोबार के तीन टापुओं के नाम देशभक्तों के नाम पर रखने के लिए धन्यवाद करते हुए थिंद ने कहा कि नवंबर 2016 में हमारी संस्था ने देश की आजादी के लिए अपनी जान निछावर करने वाले अंडमान व निकोबार की जेलों में बंद किए गए देशभक्तों को इंसाफ दिलाने के लिए जिसमें गदरी बाबो की खास भूमिका थी के लिए आंदोलन चलाया गया था। साल 2018 में मंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी अंडमान निकोबार यात्रा के दौरान तीन आईलैंड के नाम बदलने के आदेश दिए थे। इसके बाद रोस टापू का नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस टापू, नील टीपू का नाम बदलकर शहीद टापू व हैवलॉक टापू का नाम बदलकर स्वराज टापू रखा गया।