जेपी यूनिट के नाेटिस पर अाज हाेगा काेर्ट में फैसला
एमओयू को टर्मिनेट करने का नोटिस 5 मार्च को दिया था...निगम ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के 12 फरवरी के फैसले के अाधार पर जेपी एसाेसिएट काे 2005 में हुए एमअाेयू काे टर्मिनेट करने का नाेटिस 5 मार्च काे दिया था। इसमें कहा था कि क्लीन एन्वायर्नमेंट रखने अाैर म्युनिसिपल साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल 2016 लागू करना है। इस लिए जेपी के साथ हुए 2005 में एमअाेयू अनुसार यह संभव नहीं हाेगा। अब प्लांट में गारबेज प्राेसेस साइंटिफिक ढंग से नहीं हाे रहा है।
नगर निगम कमिश्नर की अाेर से 5 मार्च काे जेपी एसोसिएट काे म्यूनिसिपल साॅलिड वेस्ट प्लांट के लिए 30 दिसंबर 2015 में हुए एग्रीमेंट काे टर्मिनेट करने के लिए एक वीक का नाेटिस दिया था। नाेटिस की अवधि वीरवार काे समाप्त हाे रही है। एमसी कमिश्नर ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के 12 फरवरी के फैसले अनुसार जेपी प्रबंधन काे नाेटिस दिया था। वहीं जेपी एसाेसिएट एमसी कमिश्नर के नाेटिस के खिलाफ जिला अदालत में पहुंच गई है। वीरवार काे एडिशनल सेशन जज विजय सिंह की काेर्ट में केस लगा है। जेपी प्रबंधन निगम कमिश्नर की अाेर से दिए गए नाेटिस के खिलाफ 9 मार्च काे डिस्ट्रिक्ट काेर्ट में चली गई। डिस्ट्रिक्ट सेशन जज की काेर्ट में केस लगा, लेकिन सेशन जज ने यह कहकर केस सुनने से मना कर दिया कि उनके पास एक कराेड़ से ज्यादा के कमर्शियल केस सुनने की पावर नहीं है। इस केस की सुनवाई दाे एडिशनल सेशन जज विजय सिंह अाैर संजीव जाेशी कर सकते हैं, लेकिन दाेनाें ही एडिशनल सेशन जज लीव पर हैं। इस केस की सुनवाई वीरवार काे एडिशनल सेशन जज विजय सिंह की काेर्ट में हाे सकेगी। वहीं वीरवार काे एमसी कमिश्नर केके यादव की अाेर से दिए गए एक वीक के नाेटिस की समयावधि समाप्त हाे रही है। अगर एमसी काे एडिशनल सेशन जज की काेर्ट से राहत मिल गई ताे एमसी प्लांट का पजेशन अपने हाथाें में ले लेगा।