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सीनेटर और क्लर्क के बीच विवाद, डेढ़ घंटे तक बंद रहा एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक
पंजाब यूनिवर्सिटी के डीन ऑफ यूनिवर्सिटी इंस्ट्रक्शन (डीयूआई) ऑफिस में सुपरिटेंडेंट और सीनेटर के बीच वीरवार की शाम को हुए मामूली विवाद के कारण लगभग डेढ़ घंटे तक एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक बंद रहा। पीयू स्टाफ एसोसिएशन (पुसा) ने वीसी ऑफिस का घेराव किया। डॉ रंगा ने विवाद के दौरान सुपरिटेंडेंट को कह दिया था कि वह ग्लास उठा मारेंगे। इंप्लाइज सीनेटर डॉ अजय रंगा के विरोध में नारेबाजी करते रहे और डीयूआई ऑफिस में लंबी चली मीटिंग के बाद कहा गया कि मिस कम्यूनिकेशन हुआ था। एक ओर पुसा की नारेबाजी चल रही थी तो दूसरी ओर लॉ डिपार्टमेंट के रिसर्च स्कालर्स ने कार्यकारी वाइस चांसलर प्रो शंकर जी झा काने मैमोरंडम सौंपा। विवाद की वजह से सुपरिटेंडेंट के खिलाफ जांच और ट्रांसफर करने के लिए डीयूआई प्रो झा ने रजिस्ट्रार को लेटर लिख दिया था। इस सारे विवाद के कारण अपने कामों के लिए दूर-दूर से आए स्टूडेंट्स को परेशान होना पड़ा। इन दिनों रिजल्टस और करेक्शन आदि के लिए कई स्टूडेंट्स कैंपस में आते रहते हैं। जानकारों के मुताबिक रजिस्ट्रार प्रो कर्मजीत सिंह, पूर्व पुट प्रेसिडेंट प्रो देविंदर सिंह, डीसीडीसी प्रो संजय कौशिक, डीयूआई व कार्यकारी वीसी प्रो शंकर जी झा और पुसा प्रेसिडेंट दीपक कौशिक की मीटिंग हुई तो उसमें कहा गया कि लाॅ डिपार्टमेंट के रिसर्च स्कॉलर्स कई दिनों से अपनी पीएचडी एग्जामिनेशन संबंधित फाइल को लेकर चक्कर लगा रहे थे। एक ही गाइड यानि सीनेटर डॉ रंगा के दो स्टूडेंट्स थे। गलती से दोनों के एक ही एग्जामिनर्स तय हो गए थे। बाद में कहा गया कि जिस स्टूडेंट ने तीन महीने पहले पीएचडी थीसिस सब्मिट कर दिया है, उसकी फाइल क्लियर कर दें। इसी फाइल का स्टेटस लेने के लिए स्टूडेंट आए थे और उन्होंने डॉ रंगा का नाम लिया। स्टूडेंट्स का आरोप है कि डा रंगा के बारे में उन्होंने अपशब्द कहे। इस बात पर रंगा पहुंचे और डीयूआई ने उनको बुलाया। डीयूआई के बार-बार बुलाने पर भी सुपरिटेंडेंट भूमि सिंह नहीं आए तो रंगा नीचे पहुंच गए जहां पर वह सुपरिटेंडेंट पर जम कर बरसे। उधर पुसा प्रेसिडेंट कौशिक का दावा है कि भूमि सिंह ने ये संदेश दे दिया था कि वह डॉ रंगा के जाने पर ही डीयूअाई को फाइल दिखा देंगे। वह डा रंगा काने फाइल क्यों दिखाएं। इस मले पर लंबी बहस के बाद बाहर आकर घोषणा कर दी गई कि दोनों पक्षों में गलतफहमी हुई थी जो अब दूर हो गई इसलिए विवाद खत्म हो गया।
नियम अनुसार थीसिस सब्मिट करने के तीन महीने में रिजल्ट निकलना चाहिए लेकिन तीन महीने में एग्जामिनर्स ही फाइनल नहीं हुए। यदि समय पर काम हुआ होता तो मेरे स्टूडेंट्स को या मुझे वहां पर जाने की जरूरत ही नहीं थी। सिस्टम सुधारा जाना चाहिए। -डॉ अजय रंगा, सीनेटर
मेरे पास डीयूआई ने पहले रिसर्च स्कॉलर्स की शिकायत भेजी थी और बाद में लिखा कि ट्रांसफर कर दें। लेकिन इसमें कहीं भी सुपरिटेंडेंट के कंडक्ट या पुराने रिकॉर्ड का जिक्र नहीं था।
-प्रो कर्मजीत सिंह, रजिस्ट्रार
भूमि ज्यादातर ऐसे पद पर रहे हैं जहां पर सीनेटर या कुछ अन्य लोग भी उन पर जानकारी देने का दबाव बनाते हैं इसलिए उनकी शिकायतें आम बात हैं। जाे हुआ, उसे सुलझा लिया गया है। भविष्य में भी नॉन टीचिंग स्टाफ से बदतमीजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। -दीपक कौशिक, पुसा प्रेसिडेंट
}पुसा ने किया वीसी ऑफिस का घेराव
उसमें कहा गया कि लाॅ डिपार्टमेंट के रिसर्च स्कॉलर्स कई दिनों से अपनी पीएचडी एग्जामिनेशन संबंधित फाइल को लेकर चक्कर लगा रहे थे। एक ही गाइड यानि सीनेटर डॉ रंगा के दो स्टूडेंट्स थे। गलती से दोनों के एक ही एग्जामिनर्स तय हो गए थे। बाद में कहा गया कि जिस स्टूडेंट ने तीन महीने पहले पीएचडी थीसिस सब्मिट कर दिया है, उसकी फाइल क्लियर कर दें। इसी फाइल का स्टेटस लेने के लिए स्टूडेंट आए थे और उन्होंने डॉ रंगा का नाम लिया। स्टूडेंट्स का आरोप है कि डा रंगा के बारे में उन्होंने अपशब्द कहे। इस बात पर रंगा पहुंचे और डीयूआई ने उनको बुलाया। डीयूआई के बार-बार बुलाने पर भी सुपरिटेंडेंट भूमि सिंह नहीं आए तो रंगा नीचे पहुंच गए जहां पर वह सुपरिटेंडेंट पर जम कर बरसे। उधर पुसा प्रेसिडेंट कौशिक का दावा है कि भूमि सिंह ने ये संदेश दे दिया था कि वह डॉ रंगा के जाने पर ही डीयूअाई को फाइल दिखा देंगे। वह डा रंगा काने फाइल क्यों दिखाएं। इस मले पर लंबी बहस के बाद बाहर आकर घोषणा कर दी गई कि दोनों पक्षों में गलतफहमी हुई थी जो अब दूर हो गई इसलिए विवाद खत्म हो गया।