पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • Chandigarh News Election Will Be Interesting If Bjp Jjp And Congress Fielded Two Candidates Each On Two Seats

दो सीटों पर भाजपा-जजपा और कांग्रेस ने दो-दो उम्मीदवार उतारे तो रोचक होगा चुनाव

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

कुछ ऐसे समझिए वोटों का गणित


एक राज्यसभा सीट के लिए निर्वाचन होना हो तो चुनाव संचालन नियम, 1961 के प्रावधानों के अनुसार विधानसभा के सभी सदस्यों के वोट का मूल्य एक होता है एवं इस केस में चुनाव जीतने के लिए विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या को जोड़कर उसे दो से विभाजित कर उसमें एक जोड़ दिया जाता है और जो संख्या आती है, वह चुनाव जीतने के लिए न्यूनतम कोटा होता है। जैसे हरियाणा विधानसभा की सदस्य संख्या 90 है एवं इसे दो से विभाजित किया जाए तो वह संख्या 45 बनती है। इस प्रकार जीतने वाले उम्मीदवार को 46 वोट चाहिए अर्थात 46 विधायकों का समर्थन चाहिए। चूंकि भाजपा के 40 विधायक हैं एवं उसे 10 जजपा एवं 6 निर्दलीयों (बलराज कुंडू को छोड़कर ) का समर्थन प्राप्त है जो जोड़ 56 बनता है, इसलिए भाजपा-जजपा गठबंधन के लिए राज्यसभा उपचुनाव की एक सीट जीतना तय है। कांग्रेस के पास मात्र 31 विधायक हैं। इसलिए इस सीट के लिए उसे 15 और विधायक जुटाने पड़ेंगे जो वर्तमान परिस्थितियों में असंभव हैं। इसलिए इस एक सीट के लिए केवल भाजपा-जजपा गठबंधन का उम्मीदवार ही नामांकन करेगा एवं उसे ही रिटर्निंग अफसर द्वारा सीधे निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया जा सकता है। दो नियमित राज्य सभा सीटों के लिए निर्वाचन का विषय है, मौजूदा कानूनी प्रावधानों के अनुसार ऐसी परिस्थितियों में चुनाव जीतने के लिए न्यूनतम कोटा निर्धारित करने का फार्मूला अलग है। इसके लिए हरियाणा विधानसभा की कुल सदस्य संख्या को 100 से गुना कर उसे चुनावी सीटों में एक जोड़कर उससे विभाजित किया जाता है और उसमें एक और जोड़ा जाता है। जैसे 90 गुना 100 अर्थात 9000, उसे 2 (चुनावी सीटों ) जमा 1 अर्थात 3 से विभाजित कर अर्थात 3000, जिसमें एक जोड़ दिया जाता है अर्थात 3001 बनता है। इस प्रकार इनमें जीतने के लिए न्यूनतम 3001 मूल्य के वोट चाहिए। ज्ञात रहे की इस फार्मूला में हर विधायक के एक वोट का मूल्य 100 होता है। अर्थात न्यूनतम 31 विधायकों के साथ एक राज्य सभा सीट जीती जा सकती है। इस प्रकार कांग्रेस पार्टी जिसके 31 ही विधायक है, वह एक राज्य सभा जीत सकती है बशर्ते उसके विधायक क्रॉस-वोटिंग न करें और अपनी पार्टी के उम्मीदवार को ही पहली वरीयता (पसंद) के रूप में अपना वोट दे।

चंडीगढ़ | प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए सियासी हलचल शुरू हो चुकी है। सियासी दलों के विधायकों की संख्या से भाजपा के खाते में दो, जबकि एक सीट कांग्रेस के खाते में जाना तय माना जा रहा है। बशर्ते कांग्रेस में कोई क्रॉस वोटिंग न हो या फिर कोई विधायक वोटिंग करने ही न पहुंचे। प्रदेश की दो सीटों पर आम चुनाव तो एक पर उपचुनाव होना है। दो नियमित सीटों का कार्यकाल आगामी 10 अप्रैल से 9 अप्रैल 2026 तक होगा।

बीरेंद्र सिंह क इस्तीफा देने से उपचुनाव वाली सीट का कार्यकाल 1 अगस्त 2022 तक है। इसलिए उक्त दोनों चुनावों के लिए अलग-अलग नोटिफिकेशन जारी की गई। यदि भाजपा-जजपा और कांग्रेस दोनों इन दोनों राज्यसभा सीटों के लिए अपना एक-एक उम्मीदवार उतारती है, तो संभवत: मतदान की जरूरत नहीं पड़ेगी। यदि भाजपा-जजपा गठबंधन में इस चुनाव में अपने दो उम्मीदवार उतारती है, जैसे कि कयास लगाए जा रहे हैं तो मतदान करवाना पड़ेगा और यह रोचक हो सकता है।
खबरें और भी हैं...