गुल पनाग, रब्बी और राइडर्स की टोर पंजाबी
सिटी रिपोर्टर | चंडीगढ़
बाइक राइडर्स के ग्रुप्स अक्सर अपनी बॉन्डिंग को और ज्यादा मजबूत करने के लिए एडवेंचर टुअर पर जाते रहते हैं। इस दौरान ये लोग कभी खतरों से खेलते हैं तोक कभी कोशिश करते हैं कुछ नया एक्सप्लोर करने की। होली से ठीक पहले एक ग्रुप ने पूरा किया अपना पंजाब टुअर जिसका नाम रखा गया था-पंजाब दा टोर-2020। अपने-अपने घर निकलने से पहले इस ग्रुप के राइडर्स से हमने चंडीगढ़ में की बात। ग्रुप में शामिल हुए थे एक्ट्रेस, मॉडल और ट्रैवलर गुल पनाग, सिंगर रब्बी शेरगिल और जावा की कमबैक कराने वाले अनुपम थरेजा। कुल 40 बाइकर्स में से तीन गर्ल्स राइडर थीं। इस रैली का मकसद दूसरों के लिए कुछ करना भी था तो बीएसएफ को इसमें शामिल किया गया। साथ ही आखिरी दिन राजपुरा के एसओएस विलेज भी पहुंचे।
_photocaption_पैशन, इमोशन और यादों से भरी रही ये राइड *photocaption*
पैशन साथ लिए चलता हूं
नाम- शंशाक शर्मा | उम्र- 38 | जगह- मोहाली
बाइक के साथ से बचपन की कई यादें जुड़ी हैं। पापा के पास यह बाइक हुआ करती थी। चला तो नहीं पाया, क्योंकि छोटा था लेकिन कभी आगे तो कभी पीछे बैठकर कभी यहां तो कभी वहां जाया करता। बचपन के यह पल जब भी याद आते तो चेहरे पर मुस्कान लौट आती। इसी वजह से बाइक राइडिंग का शौक हुआ। जब दोबारा से जावा बाइक्स अाईं तो ऐसा लगा मानो फिर से हसी पलाें को जीने का मौका मिल गया हो। मैंने बाइक का नया मॉडल लिया। लेकिन राइडिंग पिछले साल ही शुरू की। कसौली तो कभी सोलन राइडिंग के लिए गया। शहर में बाइकर्स ग्रुप से भी जुड़ा हूं। पहली बार पंजाब में इतनी लंबी राइड करने का मौका मिला। मैंने महसूस किया है चैलेंज तो आते ही हैं, लेकिन सभी राइडर्स एक दूसरे को मोटिवेट करते हैं तो एनर्जी लेवल बढ़ जाता है। मुश्किल राह भी आसान लगती है। वैसे मैं पेशे से इंजीनियर हूं, लेकिन अपने पैशन को साथ लेकर चलता हूं।
स्टंट की कमाई से बाइक ली
नाम- अक्की | उम्र- 27 | जगह- कर्नाटक
मैं स्टंटमैन हूं, साउथ इंडियन फिल्म, एड, फिक्शन में स्टंट करता हूं। राइडिंग 5 साल से कर रहा हूं। देखा जाए ताे दोनों में काफी फर्क है। स्टंट करना ताे पैशन है, खतरों से खेलना अाैर रिस्क लेना कब पैशन बना पता ही नहीं चला। लेकिन राइडिंग के लिए सोशल मीडिया से प्रेरित हुआ, पर मेरे पास बाइक नहीं थी। ऐसे में पहले तो स्टंट की कमाई से बाइक ली। पहले बैंगलुरू और हैदराबाद राइड के लिए फिर लद्दाख गया। यह डेढ़ साल पहले की बात है। पहले भी पंजाब आया हूं, लेकिन राइडिंग के लिए पहली बार आया। ग्रीनरी देखने को मिली। सच कहूं चाहे स्टंट करना हो या राइडिंग खुद को फिजिकली और मेंटली स्ट्रॉन्ग रखना पड़ता है। फिजिकली स्ट्रॉन्ग तो खाने-पीने व वर्क आउट करने से हो सकते हैं मेंटली स्ट्रॉन्ग के लिए टेंशन फ्री होना जरूरी है। इसके अलावा राइडिंग स्किल्स भी जरूरी है।
}नाम सुजैन चौधरी | } उम्र -41 | }जगह- मुबंई
8 महीने पहले ही मैंने राइडिंग शुरू की थी। यह मेरी पहली लंबी राइड थी। राइडिंग के साथ पैशन और पुरानी यादें जुड़ी हो तो चैलेंज नजर नहीं आते। मेरे पापा के पास जावा बाइक थी, अक्सर उस पर बैठ कर जाया करती। जब थोड़ी बड़ी हुई तो पापा ने बाइक चलानी सिखाई, तब पापा के पास यज्दी हुआ करती। राइडिंग के समय मैंने पापा को बहुत याद किया, वह अब इस दुनिया में नहीं हैं। इस राइड के साथ बचपन के उस दृश्य को फिर से जीया। फर्क इतना था कि मैं इस बार राइड कर रही थी। मेरे पास अब दो बाइक हैं। पंजाब की ताजी हवा मुंबई में भी याद आती रहेगी।
गुल पनाग, रब्बी शेरगिल और सरहद
हालांकि इस ग्रुप में ट्राईसिटी के अलावा देश के अन्य हिस्सों के राइडर्स भी शामिल हुए थे, लेकिन अगुआई कर रहे थे गुल पनाग और रब्बी शेरगिल। इन लोगों ने शुरुआत की अमृतसर हरमिंदर साहब में मत्था टेककर और आखिर में पहुंचे एसओएस विलेज। इस दौरान भारत-पाकिस्तान की सरहदों तक भी ये लोग गए। वाघा से लेकर हुसैनीवाला तक जाते हुए ये लोग लगातार बीएसएसफ वालों के कॉन्टेक्ट में रहे। अनुपम ने बताया कि टुअर को पूरा करने के लिए म्युजिकल कॉन्सर्ट का भी सहारा लिया गया, जिनमें गुरदास मान ने पीयू और बी प्रैक, परमीश वर्मा ने पंजाब में परफॉर्म किया।
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