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दहेज हत्या के मामले में पति और उसकी मां को 7-7 साल कैद

एक वर्ष पहले
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जिला अदालत ने दहेज हत्या के मामले में दोषी सचिन और उसकी मां बबली को सात-सात साल की सजा सुनाई है। वहीं सचिन के फूफा रजिंद्र के खिलाफ के खिलाफ साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। मामला सेक्टर-52 का है। वहीं मृतक की पहचान सचिन की प|ी नैना के रूप में हुई थी। रजिंद्र के वकील दीक्षित अरोड़ा ने बताया कि अभियोजन पक्ष रजिंद्र के खिलाफ केस को साबित नहीं कर पाई।

अदालत में अपनी दलील में कहा कि रजिंद्र और नैना का परिवार एक ही घर में नहीं रहता । दूसरा अभियोजन पक्ष कहीं भी यह साबित नहीं कर
सका कि राजिंद्र ने कभी नैना को दहेज के लिए कहा हो। साथ ही राजिंद्र के बेटे की प|ी ने कोर्ट में गवाही दी कि राजिंद्र उनके ससुर हैं और उन्होंने कभी उनसे दहेज की मांग नहीं कि तो नैना से कैसे दहेज के लिए कह सकते है।

दर्ज मामले के मुताबिक, नैना की मां ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनकी बेटी की शादी सेक्टर-52 के सचिन के साथ हुई थी। शादी के समय दहेज भी दिया था। लेकिन शादी के एक साल बाद ही वह नैना से 50 हजार रुपये और गाड़ी की मांग करने लगे। उनकी बेटी ने कई बार फोन कर बताया भी था कि ये उसे दहेज के लिए परेशान किया जा रहा है। कई दफा उसने रोते हुए कहा कि अब दिल करता है कि जान ही दे दूं।

आरोप के तहत नैना के ससुराल वाले उसे काली के नाम से पुकारते थे। इस वजह से परेशान होकर उनकी बेटी ने जीवन लीला खत्म कर ली। इसके बाद सेक्टर-36 थाना पुलिस ने उक्त लोगों के अलावा सचिन के भाई और बहन पर भी केस दर्ज किया था। लेकिन इसके बाद जांच कर जब चालान पेश किया तो उसमें सिर्फ सचिन, बबली सचिन की माता और राजिंद्र सचिन का फूफा के ही नाम थे।

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