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एेसी साेच से गाता हूं कि 20 साल बाद भी गाना नया लगे

एक वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर | चंडीगढ़

कई लोगों को लगता है कि अगर बेहतर टैग लाइन, प्रोड्यूसर, वीडियो हो तो सिंगर बन सकते हैं। यह माइंड सेट की बात है। लेकिन मेरे एेसा नहीं है। मैं जो कुछ भी करता हूं यह सोच कर करता हूं कि आज से 20 साल बाद मेरे गाने को सुना या देखा जाए तो वह ताजा लगे, महकता हुआ ही लगे। सिंगर, राइटर, कंपोजर, एक्टर सतिंदर सरताज बता रहे थे अपने काम करने के तरीके के बारे में। एक कार्यक्रम में उनसे मुलाकात हुई थी। उन्होंने सिंगिंग व फिल्म को लेकर बात की। सरताज ताजा व महकते हुए गाने की बात आगे बढ़ाते हुए बोले- इस तरह की चीज काे बनाने के लिए लंबी साधना की जरूरत है। साथ ही जरूरत है शिद्दत, रजा, तलब और जज्बात की। मेरे कहने का मतलब है कि यह चारों एलिमेंट आर्टिस्ट में होने चाहिए। एक्टिंग की बात करें तो मैं शौक के तौर पर एक्टिंग करता हूं, अगर लगता है कि फलां फिल्म मुझे करनी चाहिए तो मैं करता हूं। कोशिश यही रहती है कि ऐसी फिल्म की जाए जिसमें मनोरंजन हो साथ ही कंटेंट ऐसा हो जो लोगों पर अच्छा प्रभाव छोड़े। वैसे मेरा पैशन है लाइव स्टेज पर परफॉर्म करना और यही मेरा करिअर है।

फिल्म से पॉजिटिव चीजें लेनी चाहिए

सरताज पंजाबी सिनेमा में डेब्यू कर चुके हैं। फिल्मों को लेकर वे बोले- मेरा मानना है कि ऑडियंस काे फिल्म के नजरिए से ही देखनी चाहिए। हो सके तो पॉजिटिव चीजें ही फिल्मों से ले। वहीं दूसरी ओर मेकर्स, आर्टिस्ट की बात करें तो माना कि आर्टिस्ट को फ्रीडम होनी चाहिए कि वह किसी भी विषय में फिल्म बना ले। लेकिन मेकर्स काे यही भी देखना कि उन्हीं के परिवार में अगर उनकी फिल्म देखकर किसी पर बुरा प्रभाव पड़े जाए तो। ऐसे में सोचना बेहद जरूरी है।

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