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कोर्ट फैसला करेगा तो कोताही के लिए अफसरों की जिम्मेदारी तय होगी: हाईकोर्ट

एक वर्ष पहले
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7827 कर्मचारियों ने आवेदन किया था...प्रशासन ने फरवरी 2008 में इंप्लाइज हाउसिंग स्कीम लांच की थी। इस स्कीम के अंतर्गत 7827 कर्मचारियों ने आवेदन किया था। स्कीम का ड्रा नवंबर 2010 को निकाला गया था। ड्रा में 3930 कर्मचारियों का नाम निकला तथा 3897 असफल रहे थे।

चंडीगढ़ के चार हजार से अधिक कर्मचारियों का अपने मकान का सपना पूरा करना अब केंद्र सरकार के हाथों में है। शुक्रवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के गृह विभाग के सेक्रेटरी को इस मामले में चंडीगढ़ प्रशासन में प्रशासक के एडवाइजर और चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के सेक्रेटरी के साथ बैठक कर फ्लैट की बढ़ी हुई कीमत पर विवाद को सुलझाने के निर्देश दिए गए हैं। जस्टिस राजन गुप्ता और जस्टिस कर्मजीत सिंह की खंडपीठ ने कहा कि इस सारी कार्रवाई में याचिका दायर करने वालों की तरफ से भी तीन प्रतिनिधि शामिल किए जाएं। कोर्ट ने साफ किया कि बावजूद इसके कोई हल नहीं निकला और कोर्ट को इस मामले में फैसला करना पड़ा तो फिर इस सारे मामले में कोताही के लिए अफसरों की जिम्मेदारी भी तय होगी और अधिकारियों को सजा के लिए तैयार भी रहना होगा। कोर्ट ने दो माह का समय देते हुए मामले पर 12 मई के लिए अगली सुनवाई तय की है।

बढ़ी हुई कीमतों को चुनौती: इस संबंध में अलग अलग याचिकाएं दायर कर चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के उस पब्लिक नोटिस को चुनौती दी गई है जिसमें स्कीम को लांच करने के लिए बढ़ी हुई कीमतों के साथ कंसेंट मांगी गई है। गृह मंत्रालय ने चंडीगढ़ प्रशासन को हाउसिंग बोर्ड को जमीन देने पर सहमति तो दे दी थी लेकिन मार्केट रेट से जमीन देनी की बात कही गई। इससे कीमतें कई गुणा बढ़ गई। इसे देखते हुए चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने पब्लिक नोटिस देकर कंसेंट मांगी जिसे कोर्ट में चुनौती दे दी गई।

वर्ष 2005 में जमीन मिली थी: प्रशासन ने 2005 में इंप्लाइज हाउसिंग के लिए जमीन ऐलोकेट कर ली थी। उस समय जमीन का रेट 7910 रुपये रखा गया था। फाइनेंस डिपार्टमेंट के निर्देश के बाद 10 जनवरी 2008 को इस्टेट आफिस ने हाउसिंग बोर्ड को जमीन का लैटर आफ इंटेंट जारी कर दिया। नियमों के अनुसार बोर्ड को जमीन की कुल कीमत का 25 प्रतिशत 30 दिन में जमा कराना था लेकिन बोर्ड ने यह राशि जमा ही नहीं कराई। जिसके चलते बोर्ड को यह जमीन अलाट नहीं हो सकी थी।

हाईकोर्ट के लिए पार्किंग प्रोजेक्ट को मॉनिटरिंग कमेटी ने भी कहा ओके, नहीं आ रही कैचमेंट एरिया में...

चंडीगढ़ |पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के लिए बनने वाली नई पार्किंग को लेकर मंजूरी दी गई है। चंडीगढ़ प्रशासन की ईको सेंसेटिव जोन माॅनेट्रिंग कमेटी की मीटिंग में इस प्रोजेक्ट को रखा गया था। जिसमें इस प्रोजेक्ट को सुखना कैचमेंट एरिया से बाहर बताया गया। हाईकोर्ट के लिए यहां पर एक तीन बेसमेंट वाली पार्किंग बननी है जिसको लेकर एजेंडा मीटिंग में रखा गया था। मीटिंग में इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट, अर्बन प्लानिंग और फाॅरेस्ट एंड वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट के आॅफिसर्स शामिल हुए। मीटिंग में कहा गया कि वर्ष 2004 के सर्वे आॅफ इंडिया के मैप के हिसाब से जिस जगह पर ये पार्किंग बनाई जानी है वो कैचमेंट एरिया में नहीं आता है इसलिए इसको बनाने पर कोई परेशानी नहीं है। हांलाकि ये जगह ईको सेंसेटिव जोन के साथ लगती है। वहीं इस प्रोजेक्ट को लेकर एन्वायर्नमेंट डिपार्टमेंट से क्लियरेंस के लिए इंजीनयरिंग डिपार्टमेंट की तरफ से प्रपोजल भेजा है।
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