जाे किरदार हम जीवन में निभाते हैं वहीं कहानियां ‘दर्द परिंदे दा’ में
सिटी रिपोर्टर | चंडीगढ़
पंजाबी लेखक सभा ने पंजाब साहित्य अकादमी के सहयाेग से पंजाब कला भवन में कार्यक्रम साहित्यिक समागम का अायाेजन किया। इसमें कहानीकार मंजीत काैर मीत की किताब दर्द परिंदे दा का विमोचन किया गया। इसके अलावा 2010 में प्रकाशित इन्ही की किताब जदाे काेई फाैजन हुंदी ए की हिन्दी अनुवादित किताब जब काेई फाैजन हाेती है का भी विमाेचन किया गया। इसका हिन्दी अनुवाद डाॅ. मनिका कपिल ने किया। अपनी किताब के बारे में मंजीत ने बताया कि किताब दर्द परिंदे में 48 कहानियां हैं। ये मेरी तीसरी किताब है। इसमें मुख्य कहानी पिता अाैर पुत्र के विरह पर अाधारित है। इसके अलावा सभी कहानियाें में अाम जीवन में हम जाे किरदार निभाते हैं वही पात्र हैं जाे सामाजिक कहानियाें से जुड़े हुए हैं। अपनी किताब के हिंदी अनुवाद हाेने के बारे में बाेलीं कि मैं ज्यादातर फाैजियाें पर लिखती हूं। इसका कारण यह भी है कि मेरे पति भी फाैजी थे। इस किताब में फाैजी पति के पीछे उसकी प|ियाें की जिंदगी के बारे में लिखा है। बाेलीं- क्याेंकि ज्यादातर फाैजी हिंदी भाषा जानते हैं इसलिए खुशी है कि अब इसका हिन्दी वर्जन सभी पढ़ पाएंगे। साहित्य से जुड़े अपने रुझान काे लेकर बाेलीं कि भाषा विभाग में काम करने के दाैरान साहित्यकाराें व किताबाें के बारे में अकसर पढ़ा करती वहीं से रुझान शुरू हुअा। साेचा खुद भी किताब लिखी जाए। इस माैके पर मनमाेहन सिंह दऊं, गुरनाम कमल ने किताब पर चर्चा की। इसके अलावा केके शारदा, जगरूप सिंह, प्रेम विज, बलकार सिद्धृ, दीपक शर्मा चनारथल भी इस माैके पर माैजूद रहे।
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