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कैट ने खारिज की डॉ.प्रमोद की याचिका, अब चलेगा सेक्सुअल हैरासमेंट का केस
{4 साल पहले एक महिला कर्मचारी ने दी थी गुप्ता के खिलाफ शिकायत
सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) ने पीजीआई के डॉ.प्रमोद कुमार गुप्ता की याचिका को खारिज कर दिया है। उनके खिलाफ डायरेक्टर के आदेश पर इंक्वायरी शुरू हुई थी जिसमें वे पेश नहीं हो रहे थे।
उन्होंने अपने खिलाफ हुई चार्जशीट को कैट में चैलेंज किया था, लेकिन उनकी याचिका कैट ने मंजूर नहीं की। कैट ने अपने ऑर्डर में लिखा कि डॉ.गुप्ता जानबूझकर इंक्वायरी को टालने की कोशिश कर रहे हैं। डिपार्टमेंट ऑफ बायोस्टैटिक्स के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.प्रमोद कुमार गुप्ता के खिलाफ एक महिला कर्मचारी ने 27 जनवरी 2016 को शिकायत दी थी। उनकी शिकायत पर सेक्सुअल हरासमेंट कमेटी ने जांच शुरू कर दी।
हालांकि शुरुआती जांच में उनके खिलाफ लगे आरोप साबित नहीं हो सके लेकिन उनके खिलाफ जांच के लिए दोबारा कमेटी बनाई गई। इस कमेटी ने डायरेक्टर पीजीआई के ऑर्डर पर उन्हें चार्जशीट कर दिया। उन्होंने चार्जशीट किए
जाने के खिलाफ कैट में याचिका दायर की जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी अपॉइंटमेंट पीजीआई की गवर्निंग बॉडी ने की है और वे ही उनकी चार्जशीट पर फैसला ले सकते हैं। उनकी इस याचिका को कैट ने मंजूर कर लिया था और चार्जशीट के फैसले को खारिज कर दिया। लेकिन डायरेक्टर पीजीआई ने दोबारा उनके खिलाफ चार्जशीट कर दी।
इस बार डायरेक्टर ने जांच के लिए एक इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर(आईओ)भी अपॉइंट कर दिया। डॉ.गुप्ता को इंक्वायरी में शामिल होने के लिए कहा गया। लेकिन डॉ.गुप्ता ने
चार्जशीट और आईओ की अपॉइंटमेंट के खिलाफ फिर से कैट में याचिका दायर कर दी। उनकी याचिका पर पीजीआई ने जवाब दिया कि डायरेक्टर के पास ग्रुप-ए फैकल्टी पोस्ट के खिलाफ कार्रवाई करने की अथॉरिटी है। जिसके बाद कैट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया।