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25-27 डिग्री रहेगा पारा, फिर छाएंगे बादल, 11-13 तक बारिश
आज दिन का तापमान प्रदेश के अधिकांश जिलों में सामान्यत: 25 से 27 डिग्री के बीच रहने की संभावना है। दोपहर बाद कुछ जिलों में बादल छा सकते हैं, कहीं-कहीं शाम तक गरज चमक के साथ बूंदाबांदी भी हो सकती है। 11 से 13 तक कई इलाकों में बरसात के आसार हैं।
अाज पानी से नहीं, फूलों से होली खेलिए, पानी की बूंद-बूंद बचाइये। हम अपने लिए न सही, भावी पीढ़ियों के लिए यह कदम उठा सकते हैं। जिस तरह से पाई-पाई जोड़कर राशि जमा कर सकते हैं तो जल को भी ठीक इसी तरह से बचाना होगा। नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब हमें बूंद-बूंद के लिए तरसना पड़ सकता है। भावी पीढ़ियां इसके लिए हमें कभी माफ नहीं कर पाएंगी। हमारा हरियाणा का भू-जल स्तर 21 मीटर तक नीचे जा चुका है। यह तो औसतन है, ऐसे जिले भी हैं जहां यह 45 मीटर से भी नीचे है। पिछले साल में ही 176 एमएम कम बरसात हुई है। 16.17 लाख किसान परिवारों को भी सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली अपनानी होगी। ताकि कम पानी में अधिक पैदावार ली जा सकें।
21 मीटर तक नीचे गया पाताल, पिछले साल भी 33% कम हुई बरसात
दिन का पारा छह डिग्री तक कम, रात को भी ठंडक
फिलहाल दिन का पारा सामान्य से करीब छह डिग्री तक कम चल रहा है। इसका कारण पिछले दिनों हुई बरसात है। आज से हवा का रूख बदल सकता है। नारनौल में दिन का पारा 26 डिग्री तक जा चुका है, जबकि रोहतक में यह 22 डिग्री रहा। रात का तापमान फिलहाल 10 डिग्री के आस-पास चल रहा है। फिलहाल ठंडक बनी हुई है, अगले दिनों होने वाली बरसात के बाद भी यह 15 मार्च तक कायम रह सकती है। इसके बाद पारा धीरे-धीरे बढ़ने लगेगा।
351.8 एमएम हुई वर्ष 2019 में बरसात : हरियाणा में सालभर में सामान्यत: 528.3 एमएम बरसात होती है, वर्ष 2019 में यह 351.8 एमएम ही हुई। जो 33 फीसदी कम रही। अबकी बार एक जनवरी से अब तक प्रदेश में करीब 72 एमएम बरसात हो चुकी है। यह पानी सीधे जमीन में जाएगा। इससे भू-जल स्तर में सुधार होगा। लेकिन हम जो पानी जमीन से निकाल रहे हैं, उसे सहेज कर रखना होगा।
24 साल में 8.97 मीटर नीचे गया पानी
पिछले 24 साल में वर्ष 1995 से 2019 तक प्रदेश का भू-जल स्तर 8.97 मीटर नीचे गया है। पिछले 11 साल में यह 5.14 मीटर नीचे खिसका है। वर्ष 2018-19 में प्रदेश का भू-जल स्तर 0.40 मीटर तक नीचे खिसक गया है। वर्ष 2018 में जून में जहां प्रदेश का औसतन भू-जल स्तर 20.34 मीटर था, जून 2019 में यह 20.71 हो गया है। जून 1974 में प्रदेश का भू-जल स्तर 10.44 मीटर नीचे था, जून 1995 में यह 11.74, जून 2008 में 15.41 और जून-2019 में 20.71 मीटर हो गया।