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अब 4932 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट होंगे चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी से बाहर
}यहां 6200 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट करवाने थे
चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड के फॉरेस्ट लैंड में 4932 करोड़ के प्रोजेक्ट फंसने के कारण पिछले साल 67 वीं पोजिशन रही। इस साल 371 करोड़ के प्रोजेक्ट शुरू कर दिए हैं, फिर भी पोजिशन पीछे ही रहने वाली है। इसको देखते हुए चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सीईओ केके यादव ने पिछले महीने 4932 करोड़ के काम नहीं करवा पाने का मामला मिनिस्टरी ऑफ अर्बन डेवलपमेंट के सेक्रेटरी की मीटिंग में उठाया। सेक्रेटरी दुर्गा शंकर मिश्रा ने स्मार्ट सिटी के मिशन डायरेक्टर कुणाल कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी। कमेटी चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी के अलावा अन्य की प्रॉब्लम्स भी सुलझाएगी। वहीं, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी के पास केवल 1268 करोड़ के प्रोजेक्ट रह गए थे। इनमें मिनिस्टरी के सेक्रेटरी से 530 करोड़ से सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की अपग्रेडेशन, 499 करोड़ से एफडी से वाॅटर सप्लाई 24 x7 करवाना शामिल है। इससे स्मार्ट सिटी लिमिटेड के प्रोजेक्ट अब 1268 करोड़ से बढ़कर 2297 करोड़ हो गए।
}सेक्टर-43 मेंं पीपीपी मोड पर बनने थे ये प्रोजेक्ट...
चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने सेक्टर-43 में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर 4932 करोड़ 5 लाख के प्रोजेक्ट बनाने थे। इनमें एग्जीबिशन सेंटर 120.02 करोड़, कन्वेंशन सेंटर 326 करोड़ 92 लाख, होटल्स 1312 करोड़ 45 लाख, ए ग्रेड ऑफिस स्पेस 1255 करोड़ 88 लाख ,रिटेल यानी मॉल 779 करोड़ 71 लाख, अफोर्डेबल हाउसिंग 320 करोड़ 83 लाख , हॉस्टल फैसिलिटीज 121 करोड़ 39 लाख, इंटरटेनमेंट फैसिलिटीज ब्रॉड वेज एफ एनबी 285 करोड़ 74 लाख, आइकोनिक एरिया 293 करोड़ 90 लाख, आर्ट गैलरी 75 करोड़ 05 लाख और 40 करोड़ 61 लाख एरिया इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल थे।
चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड की ओर से शहर में 6200 करोड़ के प्रोजेक्ट करवाने थे। यह स्मार्ट सिटी घोषित होने से पहले ही मिनिस्टरी ऑफ अर्बन डेवलपमेंट के पास प्रपोजल बनाकर भेजी गई थी। इसमें सेक्टर-43 में 4932 करोड़ 05 लाख के पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर बनने थे। इनकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी तैयार हो चुकी थी। लेकिन जब स्मार्ट सिटी कंपनी ने प्रशासन से सेक्टर-41 की 71 एकड़ जमीन पर पजेशन लेने की बात चलाई तो फॉरेस्ट विभाग ने ऑब्जेक्शन रेज कर दिया। इस जमीन पर 19 साल से पौधे लगाए हुए हैं, इसलिए ग्रीनरी की हर साल मिनिस्टरी ऑफ फॉरेस्ट एंड एन्वायर्नमेंट को रिपोर्ट भेजी जा रही है। ऐसे में जमीन फॉरेस्ट एरिया से किसी भी सूरत में बाहर नहीं निकलने वाली है। प्रशासन ने पीपीपी मॉड पर प्रोजेक्ट करवाने के लिए स्मार्ट सिटी लिमिटेड के लिए जमीन उपलब्ध नहीं करवाई है।
}मिनिस्टरी से उठाया है मामला...
चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सीईअाे केके यादव का कहना है कि सेक्टर-43 फाॅरेस्ट लैंड में फंसे 4932 कराेड़ के प्राेजेक्ट काे बाहर करने का मामला मिनिस्टरी अाॅफ अर्बन डेवलपमेंट की मीटिंग में उठाया था। सेक्रेटरी अर्बन डेवलपमेंट दुर्गाशंकर मिश्रा की अाेर से स्मार्ट सिटी के मिशन डायरेक्टर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी। इसके अलावा चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी के पास 1268 कराेड़ के प्राेजेक्ट रह गए थे अब इसमें मिनिस्टरी से सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, 24x7 वाटर सप्लाई के प्रोजेक्ट को शामिल करवाया गया। इससे चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी के पास अब 2297 करोड़ के प्रोजेक्ट हो गए हैं। इन पर काम होगा।