खर्राटों के कारण मोटे बच्चे स्लीप एप्निया के शिकार
बड़ों के साथ ही अब बच्चे भी फिजिकल एक्टिविटी के अभाव में खर्राटे का शिकार हो रहे हैं। जिसकी वजह से उनमें भी स्लीप एप्निया की बीमारी होने का खतरा बढ़ रहा है। बच्चों में ऑबस्ट्रेक्टिव स्लीप एप्निया की खास वजह मोटापा, टॉन्सिल एडनोइस है। रात में मुंह खोलकर सोना और उनके स्वभाव में चिड़चिड़ापन, पढ़ाई में मन न लगना जैसे सिमटम अगर आपके बच्चे में दिख रहे हैं। तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। स्टडी में सामने आया है कि ऑबस्ट्रेक्टिव स्लीप एप्निया के चलते बच्चों को सोते समय एक घंटे में 10 सेकंड के लिए एक से अधिक बार सांस रुकने लगती है। ऐसे में उनके लिए यह घातक माना जाता है। यह बात हेड एंड नेक सर्जरी के एडिशनल प्रो. संदीप बंसल ने कही। डॉ. बंसल ने बताया कि स्लीप एप्निया का खतरा अब बच्चों में बढ़ गया है।
डाॅ. बंसल ने कहा कि 12 साल की आयु के बच्चों में स्लीप एप्निया अब आसानी से देखने को मिल जाता है। अभी तक स्लीप एप्निया केवल व्यस्क लोगों में ही सर्वाधिक देखने को मिलता था। लेकिन अब छोटी उम्र में इस दिक्कत की वजह से अगर समय पर ध्यान नहीं दिया तो बड़े होने पर बच्चों में घातक बीमारियों का सामना पड़ सकता है। जो बच्चे मोटे नहीं होते उनमें एक से तीन फीसदी खतरा रहता है। जबकि मोटापे के शिकार बच्चों में 20-50 फीसदी खतरा बढ़ जाता है। गौरतलब है कि आज वर्ल्ड स्लीप डे है।
एक सर्जरी से 85 फीसदी बच्चे हो जाते हैं ठीक
डॉ. संदीप बंसल ने बताया कि बच्चों में स्लीप एप्निया का खतरे का सबसे प्रमुख कारण हैं। उनमें मोटापा, टॉन्सिल और एडेनोइड्स का बढ़ना। जोकि बच्चों में स्लीप एप्निया का सबसे प्रमुख कारण है। डॉ. बंसल ने बताया कि लेकिन 85 प्रतिशत बच्चों की टॉन्सिल एडेनोटोन्सेलेक्टोमी सर्जरी द्वारा ठीक किया जा सकता है। बच्चों में इस बीमारी का इलाज सिर्फ सर्जरी है। जिन बच्चों का बचपन में इलाज नहीं होता तो उनके दांत भी खराब होने लगते हैं। डॉ. बंसल ने बताया कि बच्चों में यह बीमारी सिमटम से पता चलती है। बच्चों की स्लीप थैरेपी नहीं की जाती है।
डॉ. संदीप बंसल