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350 पेरेंट्स को राहत, माउंट कार्मल स्कूल की फीस बढ़ोतरी पर लगी रोक बरकरार
}गाइडलाइंस दरकिनार... सैणी ने बताया कि स्कूल ने सीबीएसई की गाइडलाइंस को भी दरकिनार कर दिया। सीबीएसई की गाइडलाइंस के मुताबिक स्कूलों को फीस बढ़ाने से पहले जस्टिफिकेशन देनी होगी कि वे फीस क्यों बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा स्कूल को पेरेंट्स की बॉडी से कंसल्ट भी करना होगा। उनसे बातचीत के बाद ही फीस में बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन स्कूल ने इन नियमों को फॉलो नहीं किया।
नया एकेडमिक सेशन शुरू होने से पहले उन 350 पेरेंट्स को डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से बड़ी राहत मिली है जिनके बच्चे माउंट कार्मल स्कूल में पढ़ते हैं। अब उन्हें केस खत्म होने तक 8 परसेंट से ज्यादा बढ़ी हुई फीस नहीं देनी पड़ेगी। सेक्टर-47 के माउंट कार्मल स्कूल ने लोअर कोर्ट के 3 साल पुराने फैसले के खिलाफ जो अपील फाइल की थी, वह सेशंस कोर्ट ने खारिज कर दी है। यानी अब लोअर कोर्ट का फैसला बरकरार रहेगा। लोअर कोर्ट ने तीन साल पहले पेरेंट्स को राहत देते हुए 8 परसेंट से ज्यादा फीस बढ़ोतरी के फैसले पर स्टे लगा दी थी। पेरेंट्स के वकील बलजीत सिंह सैणी ने कहा कि स्कूल मैनेजमेंट ने सीबीएसई की गाइडलाइंस का उल्लंघन करते हुए ट्यूशन फीस में काफी ज्यादा बढ़ोतरी कर दी थी। फीस बढ़ोतरी के खिलाफ उन्होंेेने डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में केस फाइल कर रखा है जोकि चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की कोर्ट में चल रहा है। इससे पहले उन्होंने कोर्ट से फीस बढ़ोतरी पर केस खत्म होने तक स्टे लगाए जाने की मांग की थी। उनकी एप्लीकेशन को लोकर कोर्ट ने 11 अप्रैल 2017 को मंजूर कर दिया था। इस स्टे के खिलाफ स्कूल मैनेजमेंट ने सेशंस कोर्ट में अपील फाइल कर दी थी। लेकिन एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज गगनगीत कौर की कोर्ट ने स्कूल मैनेजमेंट की अपील को भी खारिज कर दिया।
}ये है मामला... एडवोकेट सैणी ने बताया कि स्कूल ने 2017-18 के सेशन में एनुअल चार्जेस और डेवलपमेंट चार्जेस को ट्यूशन फीस में ही मर्ज कर दिया था। जिसका असर ये हुआ कि ट्यूशन फीस डबल हो गई। स्कूल के फैसले के खिलाफ पेरेंट्स ने डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में केस फाइल किया। पंजाब रेगुलेशन फीस ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट-2016 के मुताबिक स्कूल 8% से ज्यादा फीस नहीं बढ़ा सकता।
}आगे क्या? एडवोकेट बलजीत सिंह सैणी ने कहा कि अब इन 350 पेरेंट्स को पंजाब रेगुलेशन फीस ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट-2016 के मुताबिक 8 परसेंट से ज्यादा फीस नहीं चुकानी होगी। यानी अगर स्कूल मैनेजमेंट अपनी मर्जी से 8 परसेंट से ज्यादा फीस बढ़ाता है तो इन्हें 8 परसेंट तक ही बढ़ी हुई फीस देनी होगी। एडवोकेट बलजीत सिंह सैणी ने बताया कि कोर्ट में 3 साल से केस चल रहा है और वे 8 परसेंट के हिसाब से बढ़ी हुई फीस ही दे रहे हैं।